सूरत : रक्षाबंधन से पहले कपड़ा बाजार पर बाढ़ की मार, करोड़ों की साड़ियां बर्बाद; उद्योग को करोड़ो का नुकसान
बेसमेंट में भरे गंदे पानी और कीचड़ से लाखों साड़ियों का स्टॉक खराब, व्यापारियों ने सरकार से राहत पैकेज की मांग की
सूरत। लगातार हुई मूसलाधार बारिश और उसके बाद खाड़ियों में आई बाढ़ ने सूरत के कपड़ा उद्योग को भारी आर्थिक झटका दिया है। शहर के प्रमुख टेक्सटाइल बाजारों में जलभराव के कारण बेसमेंट स्थित सैकड़ों दुकानों में पानी घुस गया, जिससे बड़ी मात्रा में तैयार कपड़ा और साड़ियों का स्टॉक बर्बाद हो गया। व्यापारिक संगठनों के प्रारंभिक आकलन के अनुसार, इस प्राकृतिक आपदा से सूरत के वस्त्र उद्योग को 200 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है।
सूरत के लगभग 100 कपड़ा बाजारों में जलभराव के कारण सबसे अधिक नुकसान बेसमेंट में संचालित दुकानों को हुआ। अचानक बारिश और नालों के बैकवॉटर से सैकड़ों दुकानों में पानी भर गया।
प्रत्येक दुकान में रखी गई लगभग 1,000 से 1,500 साड़ियां गंदे पानी और कीचड़ में भीगकर पूरी तरह खराब हो गईं। व्यापारियों का कहना है कि अनुमानित एक करोड़ से अधिक साड़ियां अब उपयोग योग्य नहीं बची हैं और उन्हें नष्ट करना ही एकमात्र विकल्प है।
रक्षाबंधन और आगामी त्योहारी सीजन को देखते हुए व्यापारियों ने बड़ी मात्रा में नया स्टॉक तैयार किया था। सामान्यतः प्रत्येक व्यापारी अपनी क्षमता के अनुसार 2,000 से 5,000 साड़ियों का स्टॉक रखता है, जिसकी कीमत लाखों से लेकर करोड़ों रुपये तक होती है। लेकिन त्योहारों की शुरुआत से पहले आई इस आपदा ने व्यापारियों की पूरी तैयारी पर पानी फेर दिया।
प्रारंभिक आकलन के अनुसार, बाढ़ के कारण कपड़े के अलावा पैकिंग सामग्री, कंप्यूटर, फर्नीचर और अन्य व्यावसायिक उपकरण भी नष्ट हो गए हैं। बाजारों में कीचड़ और गंदगी के कारण कारोबार पूरी तरह ठप पड़ गया है। व्यापारियों का मानना है कि इस नुकसान से उबरने में उद्योग को कई महीने लग सकते हैं।
फोस्टा महासचिव दिनेश कटारिया ने स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि इस बार सूरत में एक हि दिन में 15 से 20 इंच तक बारिश हुई, जिसने अभूतपूर्व हालात पैदा कर दिए। उनके अनुसार, इतनी भीषण वर्षा की कल्पना भी नहीं की गई थी और शहर में पहली बार चेरापूंजी जैसे हालात देखने को मिले।
उन्होंने बताया कि तेज बारिश और नालों के बैकवॉटर के कारण व्यापारियों को अपना माल सुरक्षित स्थान पर ले जाने तक का समय नहीं मिला। गंदे पानी और कीचड़ से साड़ियों का रंग और गुणवत्ता पूरी तरह प्रभावित हो गई, जिससे लाखों का तैयार माल अनुपयोगी हो गया।
बाढ़ का असर केवल स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं रहा। परिवहन और लॉजिस्टिक्स सेवाएं प्रभावित होने से देश के विभिन्न राज्यों में कपड़ा भेजने का काम भी ठप हो गया। व्यापारिक संगठनों के अनुसार, बाहरी व्यापार में 150 से 200 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ है। समय पर आपूर्ति नहीं होने से सूरत के कपड़ा बाजार की साख पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
फिलहाल, कपड़ा व्यापारी इस संकट से उबरने के लिए राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन से आर्थिक सहायता, राहत पैकेज तथा विशेष मुआवजे की मांग कर रहे हैं।
