सूरत: वक्फ ट्रिब्यूनल का बड़ा फैसला, चौक बाजार की सरकारी जमीन पर मस्जिद निर्माण का दावा खारिज
हुसैनी मस्जिद से जुड़े पक्ष पर एक लाख रुपये का जुर्माना, ट्रिब्यूनल ने जमीन को सरकारी संपत्ति माना
सूरत। शहर के चौक बाजार चौराहे स्थित एंड्रयूज़ लाइब्रेरी के पीछे राजा ओवारा (घाट) क्षेत्र की सरकारी भूमि से जुड़े लंबे समय से चल रहे विवाद में गुजरात स्टेट वक्फ ट्रिब्यूनल ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।
ट्रिब्यूनल ने संबंधित वक्फ दावा खारिज करते हुए भूमि को सरकारी संपत्ति माना तथा याचिकाकर्ता पक्ष पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया।
याचिकाकर्ता दिपकभाई आफ्रिकावाला से प्राप्त जानकारी के अनुसार, राजा घाट क्षेत्र ऐतिहासिक संरक्षण (हेरिटेज प्रिजर्वेशन) के लिए आरक्षित है। वर्ष 2009 में यहां स्थित झुग्गियों में रहने वाले लोगों का पुनर्वास कर उन्हें अन्यत्र आवास उपलब्ध कराया गया था, जिसके बाद यह स्थान खाली कराया गया। बाद में इस क्षेत्र में कथित रूप से असामाजिक गतिविधियां शुरू होने की शिकायतें सामने आईं।
पूर्व पार्षद एवं सामाजिक कार्यकर्ता दीपक आफ्रीकावाला ने पुलिस आयुक्त, जिला कलेक्टर और सूरत नगर निगम आयुक्त को कई बार शिकायतें देकर कार्रवाई की मांग की थी। शिकायतों के आधार पर राज्य मॉनिटरिंग सेल द्वारा भी छापेमारी की गई थी।
इसके बाद इस सरकारी भूमि पर कथित रूप से मस्जिद का निर्माण शुरू होने पर दीपक आफ्रीकावाला ने नगर निगम प्रशासन के समक्ष आपत्ति दर्ज कराई। प्रारंभिक स्तर पर अवैध निर्माण हटाया गया, लेकिन आरोप है कि बाद में निर्माण कार्य फिर शुरू हो गया। इस दौरान कथित रूप से एक फर्जी वक्फ बोर्ड के माध्यम से जमीन को वक्फ संपत्ति घोषित कराने का प्रयास भी किया गया।
मामला गुजरात स्टेट वक्फ ट्रिब्यूनल में पहुंचा, जहां दीपक अफ्रीकावाला की ओर से प्रस्तुत दस्तावेजों और अधिवक्ता कौशल डी. पंड्या की दलीलों के आधार पर सुनवाई हुई। 25 जून 2026 को सुनाए गए निर्णय में ट्रिब्यूनल ने वक्फ बोर्ड से जुड़े पक्ष की अपील खारिज कर दी।
निर्णय में ट्रिब्यूनल ने कहा कि संबंधित भूमि सरकारी है, उस पर किया गया कब्जा वैध नहीं है तथा वक्फ पंजीकरण भी स्वीकार्य नहीं पाया गया। साथ ही, न्यायाधिकरण ने कथित रूप से गलत तथ्यों के आधार पर दावा प्रस्तुत करने पर हुसैनी मस्जिद से जुड़े याचिकाकर्ता पक्ष पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया।
दीपक अफ्रीकावाला ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इस निर्णय से चौक क्षेत्र के प्रस्तावित हेरिटेज संरक्षण कार्यों को आगे बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त होगा और ऐतिहासिक महत्व वाले इस क्षेत्र के संरक्षण में मदद मिलेगी।
