सूरत : “भाषा और वेशभूषा अलग हो सकती है, लेकिन भारतीय होने का भाव एक है” : महामहिम नंदकिशोर यादव

महामहिम का संदेश देश की ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की भावना को सशक्त करता है : अरविंद सिंह

सूरत : “भाषा और वेशभूषा अलग हो सकती है, लेकिन भारतीय होने का भाव एक है” : महामहिम नंदकिशोर यादव

“बिहार के कद्दावर नेता, जनसेवा की राजनीति के सशक्त हस्ताक्षर एवं वर्तमान में नागालैंड के महामहिम राज्यपाल नंदकिशोर यादव का अहमदाबाद आगमन और हिंदीभाषी महासंघ के मंच पर उनका स्वागत करना हम सभी के लिए गर्व, सम्मान और प्रेरणा का विषय रहा।” यह बात हिंदीभाषी महासंघ के महासचिव एवं भाजपा नेता (गुजरात) अरविंद सिंह ने स्टेट गेस्ट हाउस, अहमदाबाद में आयोजित भव्य स्वागत एवं सम्मान समारोह के उपरांत कही।

अरविंद सिंह ने कहा कि समारोह के दौरान महामहिम ने अपने उद्बोधन में भारतीय संस्कृति की आत्मा को अत्यंत सरल शब्दों में व्यक्त करते हुए कहा, “भाषा अलग हो सकती है, वेशभूषा अलग हो सकती है, लेकिन भारतीय होने का हमारा भाव सदैव एक रहता है।” उन्होंने कहा कि महामहिम का यह संदेश केवल उपस्थित लोगों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक प्रेरणादायी संदेश है, जो राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक अखंडता की भावना को और अधिक सुदृढ़ करता है।

उन्होंने कहा कि हिंदीभाषी महासंघ वर्षों से गुजरात में निवास कर रहे हिंदीभाषी समाज को जोड़ने, उनकी सांस्कृतिक विरासत को सहेजने तथा राष्ट्रीय एकता के मूल्यों को मजबूत करने का कार्य कर रहा है। ऐसे में महामहिम नंदकिशोर यादव जी की गरिमामयी उपस्थिति महासंघ के लिए ऐतिहासिक और अविस्मरणीय क्षण रही।  अरविंद सिंह ने कहा कि महामहिम के साथ बिताए गए पल सदैव स्मरणीय रहेंगे और उनका मार्गदर्शन समाज सेवा के क्षेत्र में नई ऊर्जा प्रदान करेगा।

इस अवसर पर हिंदीभाषी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महादेव झा, ब्रह्मर्षि महेंद्र झा (ट्रस्टी चेयरमैन, जगन्नाथ मंदिर, अहमदाबाद), विधायक दिनेश सिंह कुशवाहा, पूर्व मंत्री वासनभाई अहीर, अहमदाबाद शहर अध्यक्ष प्रताप सिंह राठौड़, संगठन मंत्री सोना सिंह, महामंत्री विशाल त्रिवेदी सहित अहमदाबाद शहर के अनेक प्रबुद्ध नागरिकों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।

अंत में अरविंद सिंह ने हिंदीभाषी महासंघ के सभी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं एवं उपस्थित अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह आयोजन केवल एक स्वागत समारोह नहीं था, बल्कि भारतीय संस्कृति, राष्ट्रीय एकता और हिंदीभाषी समाज के सम्मान का एक सशक्त उत्सव था, जो लंबे समय तक सभी की स्मृतियों में बना रहेगा।

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