सूरत : हाई कोर्ट की फटकार के बाद हरकत में आया नगर निगम, नासिरनगर के बेघर परिवारों के लिए भरी माता कम्युनिटी हॉल में अस्थायी आश्रय की व्यवस्था

बिना नोटिस की गई कार्रवाई पर कोर्ट ने मांगा जवाब; प्रभावित परिवारों से उपलब्ध सुविधाओं का लाभ उठाने की अपील

सूरत : हाई कोर्ट की फटकार के बाद हरकत में आया नगर निगम, नासिरनगर के बेघर परिवारों के लिए भरी माता कम्युनिटी हॉल में अस्थायी आश्रय की व्यवस्था

सूरत। कटारगाम दरवाज़ा क्षेत्र स्थित नासिरनगर कॉलोनी में मकान ध्वस्त किए जाने के बाद बेघर हुए 70 से अधिक परिवारों के मामले में गुजरात हाई कोर्ट की कड़ी टिप्पणी के बाद सूरत नगर निगम ने राहत संबंधी कदम उठाए हैं।

नगर निगम ने प्रभावित परिवारों के लिए भरी माता स्थित कम्युनिटी हॉल में अस्थायी आवास की व्यवस्था की है तथा सभी प्रभावित लोगों से वहां जाकर उपलब्ध सुविधाओं का लाभ उठाने की अपील की है।

गौरतलब है कि 30 मई 2026 को नासिरनगर कॉलोनी में मिट्टी और ईंट से बने मकानों को ध्वस्त किए जाने के बाद 70 से अधिक परिवार बेघर हो गए थे। प्रभावित लोगों का आरोप था कि कार्रवाई से पहले उन्हें कोई लिखित नोटिस या पर्याप्त समय नहीं दिया गया। घटना के बाद स्थानीय स्तर पर विरोध प्रदर्शन हुए और प्रभावित परिवारों ने पुनर्वास की मांग को लेकर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।

मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने बिना पूर्व नोटिस कार्रवाई किए जाने पर नगर निगम से कड़ा जवाब मांगा और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के संबंध में स्पष्ट जानकारी प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। न्यायालय ने इस मामले की अगली सुनवाई आगामी सोमवार को निर्धारित करते हुए नगर निगम को सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ उपस्थित रहने का आदेश दिया है।

इस बीच, नगर निगम ने भरी माता स्थित कम्युनिटी हॉल में अस्थायी आश्रय की व्यवस्था करते हुए वहां बिजली, पेयजल, शौचालय सहित आवश्यक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की तैयारी की है। प्रशासन ने प्रभावित परिवारों से अपील की है कि वे अस्थायी रूप से कम्युनिटी हॉल में स्थानांतरित होकर उपलब्ध सुविधाओं का लाभ उठाएं।

उल्लेखनीय है कि घटना के बाद प्रारंभिक स्तर पर नगर निगम के अधिकारियों ने तोड़फोड़ की कार्रवाई से इनकार किया था। हालांकि, बाद में नगर निगम प्रशासन ने स्वीकार किया कि डी-मार्किंग के दायरे में आने वाले निर्माणों को हटाने की कार्रवाई नगर निगम द्वारा की गई थी, जिसके बाद यह मामला और अधिक चर्चा में आ गया। अब सभी की निगाहें हाई कोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई और नगर निगम द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले जवाब पर टिकी हैं।

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