अमरनाथ यात्रा में सूरत की सेवा परंपरा: 28 वर्षों से श्रद्धालुओं को मिल रहा शुद्ध गुजराती भोजन का प्रसाद
3 जुलाई से शुरू होने वाली यात्रा के लिए सूरत से दो ट्रक सामग्री रवाना, नुनवान कैंप में 20 से अधिक स्वयंसेवक देंगे सेवा
सूरत। बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए अमरनाथ यात्रा पर जाने वाले गुजराती श्रद्धालुओं को कश्मीर की वादियों में भी घर जैसा स्वाद और अपनापन मिले, इसके लिए सूरत की शिवशक्ति सेवा समिति पिछले 28 वर्षों से निस्वार्थ सेवा कर रही है। चंदनवाड़ी स्थित नुनवान बेस कैंप में समिति की ओर से श्रद्धालुओं को शुद्ध गुजराती भोजन का प्रसाद परोसा जाता है।
इस वर्ष 3 जुलाई से प्रारंभ होने वाली अमरनाथ यात्रा की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और सूरत से दो ट्रक खाद्य सामग्री एवं रसोई का आवश्यक सामान कश्मीर भेजा जा चुका है।
समिति के सहयोग से नुनवान कैंप में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालुओं के लिए दाल-भात, खिचड़ी-कढ़ी, गुजराती सब्जी, रोटी, पूरी, खमण, पाव, भजिया तथा अन्य पारंपरिक व्यंजन तैयार किए जाएंगे।
नाश्ते में आलू पाव, खमण, भजिया और ड्राई फ्रूट्स की व्यवस्था रहेगी। भोजन पूरी तरह गुजराती स्वाद के अनुरूप तैयार किया जाएगा, ताकि श्रद्धालुओं को घर जैसा अनुभव मिल सके।
यह भंडारा पिछले लगभग 65 वर्षों से श्री श्री 1008 बाबा राम रामैया महाराज के आश्रम द्वारा संचालित किया जा रहा है। वर्ष 1997 से शिवशक्ति सेवा समिति इस सेवा से जुड़ी हुई है और तब से गुजराती श्रद्धालुओं के लिए विशेष भोजन की व्यवस्था लगातार जारी है।
समिति के पदाधिकारियों एवं समाजसेवी वजुभाई सुहागिया के अनुसार, वर्ष 1996 की अमरनाथ यात्रा के दौरान गुजराती यात्रियों को उपयुक्त भोजन नहीं मिलने से काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था। इसके बाद बाबा राम रामैया महाराज के सहयोग से वर्ष 1997 में गुजराती भोजन सेवा की शुरुआत की गई, जो आज भी निरंतर जारी है।
इस वर्ष यात्रा के दौरान सूरत से 20 से अधिक स्वयंसेवक अलग-अलग चरणों में सेवा देंगे। इनमें किरण पटेल सुरती, अश्विनी अकबरी, प्रवीण डागरिया, कांती मुंगरा, रघु बाबरिया, धीरू भंडेरी, मधु सावलिया, वजू भाई वेकारिया सहित कई स्वयंसेवक शामिल हैं। भोजन सेवा के साथ-साथ यात्रियों को मार्गदर्शन एवं आवश्यकता पड़ने पर अन्य सहयोग भी उपलब्ध कराया जाएगा।
भंडारे में गुजराती स्वाद बनाए रखने के लिए मूंगफली का तेल, देसी घी, गेहूं का आटा, चाय, मसाले, मिल्क पाउडर सहित अन्य आवश्यक सामग्री सूरत से ही भेजी जाती है। पहाड़ी क्षेत्र में दूध की उपलब्धता सीमित होने के कारण चाय और अन्य उपयोग के लिए विशेष रूप से मिल्क पाउडर की व्यवस्था की जाती है।
गुजरात के दानदाताओं और समाजसेवियों के सहयोग से संचालित यह सेवा पिछले 28 वर्षों से अमरनाथ यात्रा पर जाने वाले हजारों श्रद्धालुओं के लिए आस्था, सेवा और संस्कार का प्रतीक बनी हुई है।
कश्मीर की बर्फीली वादियों में जब श्रद्धालुओं को गर्मागर्म खिचड़ी-कढ़ी, दाल-भात और खमण परोसा जाता है, तो उन्हें केवल भोजन ही नहीं, बल्कि अपने घर और गुजरात की मिट्टी का अपनापन भी महसूस होता है।
