सूरत : श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन महारास, कंस वध और रुक्मिणी विवाह प्रसंगों ने श्रद्धालुओं को किया भावविभोर
सोमवार को कथा प्रातः 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक रहेगी, इसके पश्चात हवन एवं महाप्रसाद के साथ होगा कथा का समापन
श्री शक्ति धाम सेवा समिति द्वारा श्री राणी सती दादी मंदिर के रजत जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के छठे दिन रविवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर धर्मलाभ प्राप्त किया। सिटी लाइट स्थित महाराजा अग्रसेन पैलेस के पंचवटी हॉल में आयोजित इस धार्मिक आयोजन में प्रतिदिन भक्तों की उल्लेखनीय उपस्थिति देखने को मिल रही है।
कथा प्रारंभ होने से पूर्व मुख्य यजमान परिवार ने विधि-विधान से व्यासपीठ का पूजन एवं आरती की। इसके पश्चात आयोजन समिति के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने भागवताचार्य राधेश्याम शास्त्री का माल्यार्पण कर स्वागत किया तथा उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। आयोजन समिति के सोमवार को प्रातः 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक आयोजित कथा में मुक्ति स्कंद, सुदामा चरित्र, श्री शुकदेवजी की विदाई एवं भागवात विश्राम के पश्चात हवन एवं अपरान्ह 2 बजे से महाप्रसाद के साथ सात दिवसीय कथा का समापन होगा।
व्यासपीठ से कथा का रसपान कराते हुए भागवताचार्य राधेश्याम शास्त्री ने महारास लीला, कंस वध, उद्धव प्रसंग, रुक्मिणी विवाह तथा फूलों की होली सहित अनेक महत्वपूर्ण प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण और श्रीराधा एक-दूसरे के अभिन्न स्वरूप हैं तथा भक्तों को सुख प्रदान करने के लिए दो रूपों में प्रकट हुए हैं। उन्होंने बताया कि राधा प्रेम की साक्षात धारा हैं और गोपियां प्रेम की पराकाष्ठा का प्रतीक हैं।
महाराजश्री ने महारास लीला का वर्णन करते हुए कहा कि यह आत्मा और परमात्मा के मिलन का दिव्य प्रतीक है। गोपियों का भगवान श्रीकृष्ण के प्रति निष्काम प्रेम यह संदेश देता है कि सच्ची भक्ति में स्वार्थ का कोई स्थान नहीं होता। कथा के दौरान कंस के धनुष यज्ञ, भगवान श्रीकृष्ण के मथुरा गमन तथा कंस वध के प्रसंगों का भी विस्तार से वर्णन किया गया। उन्होंने कहा कि जब-जब अधर्म बढ़ता है, तब-तब भगवान धर्म की स्थापना के लिए अवतार लेते हैं और सत्य की विजय सुनिश्चित करते हैं।

उद्धव-गोपी संवाद का वर्णन करते हुए भागवताचार्य ने बताया कि जब भगवान श्रीकृष्ण ने उद्धव को ब्रज भेजा, तब उन्हें गोपियों से सच्चे प्रेम, समर्पण और भक्ति का वास्तविक अर्थ समझने का अवसर मिला। गोपियों की अटूट भक्ति यह दर्शाती है कि प्रेम में अहंकार और तर्क का कोई स्थान नहीं होता।
कथा के दौरान भागवताचार्य राधेश्याम शास्त्री ने “मेरी बरसाने कुटिया बना दे लाडली”, “समाए गई दिल में ओ सांवरिया”, “बृज की गली-गली में शोर आयो माखन चोर”, “कान्हा मोहे ज्यादा लगे तू प्यारा” तथा “खुश होंगे कन्हैया लाल, बस राधे-राधे जपा करो” जैसे भक्ति गीतों की प्रस्तुति देकर श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं, फूलों की होली के विशेष आयोजन में “रंग डारी चूनर कोरी”, “रंग लेकर खेलते, गुलाल लेकर खेलते” जैसे भजनों पर पूरा पंडाल भक्तिरस में सराबोर हो गया। श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति की।
