सूरत : साउथ गुजरात सोलर एसोसिएशन ने सौर ऊर्जा क्षेत्र की चुनौतियों पर सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की
अव्यावहारिक नीतियों, ग्रिड कटौती और अतिरिक्त शुल्कों से सौर उद्योग संकट में; निवेश और देश के नेट-ज़ीरो लक्ष्य पर मंडराया खतरा
सूरत। साउथ गुजरात सोलर एसोसिएशन ने कमर्शियल एवं इंडस्ट्रियल (C&I) सोलर सेक्टर के समक्ष उत्पन्न गंभीर चुनौतियों को लेकर केंद्र और राज्य सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
एसोसिएशन का कहना है कि अव्यावहारिक नीतियां, घरेलू सौर सेल की सीमित उपलब्धता, ग्रिड संबंधी समस्याएं तथा वितरण कंपनियों (DISCOMs) द्वारा लगाए जा रहे अतिरिक्त शुल्क सौर ऊर्जा क्षेत्र की प्रगति में बड़ी बाधा बन रहे हैं।
एसोसिएशन के अनुसार, वर्तमान परिस्थितियों के कारण न केवल अरबों रुपये के निजी निवेश प्रभावित हो रहे हैं, बल्कि देश के नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों और वर्ष 2070 तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन के संकल्प को भी झटका लग सकता है।
सौर परियोजना डेवलपर्स और औद्योगिक उपभोक्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया, तो उद्योगों को हरित ऊर्जा की ओर स्थानांतरित करने की प्रक्रिया गंभीर रूप से प्रभावित होगी।
एसोसिएशन ने कहा कि कुछ नीतिगत निर्णयों के कारण सौर परियोजनाओं की लागत में अचानक 25 से 30 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है, जबकि ग्रिड प्रबंधन संबंधी कमियों के कारण कई स्थानों पर उत्पादित सौर ऊर्जा का 60 से 70 प्रतिशत हिस्सा उपयोग में नहीं आ पा रहा है। इससे परियोजना संचालकों और निवेशकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
सौर उद्योग द्वारा उठाए गए प्रमुख मुद्दे
1. DCR और ALCMM से जुड़ी आपूर्ति श्रृंखला की समस्या
उच्च दक्षता वाले सोलर सेल के घरेलू उत्पादन की कमी के बावजूद अनिवार्य घरेलू सामग्री (DCR) नियमों के कारण परियोजनाओं की लागत में उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है।
2. नीतिगत अस्पष्टता और बाजार में एकाधिकार का खतरा
एसोसिएशन का कहना है कि सीमित घरेलू उत्पादन क्षमता के बीच DCR और ALMM से जुड़े नियम कुछ निर्माताओं को अनुचित लाभ पहुंचा सकते हैं, जिससे प्रतिस्पर्धा प्रभावित होगी।
3. ग्रिड बाधाएं और ऊर्जा कटौती
पीक आवर्स के दौरान GETCO और DISCOMs द्वारा सौर ऊर्जा उत्पादन में 60 से 70 प्रतिशत तक कटौती किए जाने की शिकायत की गई है, जिससे परियोजनाओं की आर्थिक व्यवहार्यता प्रभावित हो रही है।
4. सप्ताहांत में बिना पूर्व सूचना शटडाउन
शनिवार और रविवार को अचानक ग्रिड शटडाउन और तकनीकी अवरोधों के कारण उत्पादन प्रभावित होता है। एसोसिएशन ने पूर्व सूचना और मुआवजा व्यवस्था लागू करने की मांग की है।
5. डिजिटल मीटर रीडिंग पर अतिरिक्त शुल्क
सौर संयंत्रों में ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम उपलब्ध होने के बावजूद मीटर रीडिंग के नाम पर प्रति मीटर लगभग ₹5,000 तक शुल्क वसूले जाने पर उद्योग ने आपत्ति जताई है।
6. जटिल और अस्पष्ट बिलिंग व्यवस्था
बिल जारी करने में देरी, बैंकिंग गणनाओं में त्रुटियां तथा अस्पष्ट बिलिंग फॉर्मेट के कारण निवेशकों और उपभोक्ताओं में असंतोष बढ़ रहा है।
7. हितधारकों से पर्याप्त परामर्श का अभाव
एसोसिएशन ने कहा कि नीतिगत निर्णय लेने से पहले डेवलपर्स, उद्योग प्रतिनिधियों और उपभोक्ताओं से व्यापक चर्चा की जानी चाहिए।
8. दीर्घकालिक नीति स्थिरता की आवश्यकता
सौर परियोजनाओं में दीर्घकालिक निवेश को ध्यान में रखते हुए कम से कम पांच वर्षों तक नीतिगत स्थिरता बनाए रखने की मांग की गई है।
सरकार से तत्काल समाधान की अपील
साउथ गुजरात सोलर एसोसिएशन ने केंद्र और राज्य सरकार से अनुरोध किया है कि सौर ऊर्जा क्षेत्र की व्यावहारिक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए उद्योग के प्रतिनिधियों के साथ संवाद स्थापित किया जाए और आवश्यक नीतिगत सुधार लागू किए जाएं।
एसोसिएशन का मानना है कि समय पर कदम उठाए जाने से न केवल निवेशकों का विश्वास बहाल होगा, बल्कि देश के स्वच्छ ऊर्जा और सतत विकास के लक्ष्यों को भी मजबूती मिलेगी।
