सूरत पुलिस का ‘ऑपरेशन म्यूल हंट 2.0’ सफल: 58 साइबर अपराध दर्ज, 77 आरोपी गिरफ्तार

तीन दिन के विशेष अभियान में 23.85 करोड़ रुपये के साइबर फ्रॉड का खुलासा, 80 प्रतिशत मामले निवेश धोखाधड़ी और ऑनलाइन ठगी से जुड़े

सूरत पुलिस का ‘ऑपरेशन म्यूल हंट 2.0’ सफल: 58 साइबर अपराध दर्ज, 77 आरोपी गिरफ्तार

सूरत। बढ़ते साइबर अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए सूरत पुलिस द्वारा चलाए गए विशेष अभियान ‘ऑपरेशन म्यूल हंट 2.0’ के तहत बड़ी सफलता हासिल हुई है।

पुलिस आयुक्त अनुपम सिंह गहलोत के मार्गदर्शन में 31 मई से 2 जून 2026 तक चलाए गए तीन दिवसीय अभियान में कुल 58 साइबर अपराध दर्ज किए गए तथा 77 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

प्राथमिक जांच में लगभग 23 करोड़ 85 लाख रुपये के साइबर फ्रॉड का खुलासा हुआ है। पुलिस के अनुसार, इन मामलों में करीब 80 प्रतिशत धोखाधड़ी निवेश योजनाओं, ऑनलाइन ट्रेडिंग और एक्सटॉर्शन स्कैम से संबंधित है, जिनमें लोगों को अधिक मुनाफे का लालच देकर करोड़ों रुपये की ठगी की गई।

पुलिस जांच में सामने आया है कि साइबर अपराधी ‘म्यूल अकाउंट’ यानी किराए पर लिए गए बैंक खातों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रहे हैं। आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को कमीशन या धनराशि का लालच देकर उनके बैंक खाते हासिल किए जाते हैं।

ठगी की रकम पहले इन खातों में जमा कराई जाती है और फिर कुछ ही मिनटों में कई अन्य खातों में ट्रांसफर कर दी जाती है, जिससे धन के वास्तविक स्रोत और गंतव्य का पता लगाना कठिन हो जाता है।

सूरत पुलिस ने अभियान शुरू करने से पहले लगभग एक माह तक गुप्त तैयारी की। नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCCRP) पर दर्ज शिकायतों, संदिग्ध बैंक खातों और वित्तीय लेन-देन के पैटर्न का विस्तृत विश्लेषण किया गया। शहर के सभी पुलिस थानों की साइबर टीमों को संदिग्ध खातों और उन्हें संचालित करने वाले एजेंटों की जानकारी एकत्र करने के निर्देश दिए गए थे।

अभियान को प्रभावी बनाने के लिए 15 मई को बैंक अधिकारियों, फिनटेक कंपनियों, टेलीकॉम सेवा प्रदाताओं और दूरसंचार विभाग के साथ समन्वय बैठक आयोजित की गई। इसके बाद 16 मई को शहर के 500 से अधिक पुलिसकर्मियों को साइबर विशेषज्ञों और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स द्वारा विशेष प्रशिक्षण दिया गया।

तीन दिवसीय अभियान के दौरान सूरत साइबर क्राइम सेल और विभिन्न पुलिस थानों की 50 से अधिक टीमों ने गुजरात, दिल्ली, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक समेत कई राज्यों में एक साथ कार्रवाई की। NCCRP, SAMANVAYA और SAHYOG जैसे तकनीकी प्लेटफॉर्म की सहायता से कुल 77 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से बड़ी संख्या में सिम कार्ड, डेबिट कार्ड और डिजिटल साक्ष्य बरामद किए गए हैं। जांच में सामने आया कि आरोपी विभिन्न तरीकों से लोगों को निशाना बना रहे थे।

इनमें होटल बुकिंग, बीमा पॉलिसी, नकली ऑनलाइन शॉपिंग विज्ञापन, वर्क वीजा, डायमंड ट्रेनिंग, ड्राइविंग लाइसेंस, लोन, पार्सल डिलीवरी और फर्जी नौकरी के ऑफर शामिल हैं। इसके अलावा संदिग्ध APK फाइलें भेजकर मोबाइल फोन हैक करने के मामले भी सामने आए हैं।

सबसे अधिक मामले निवेश धोखाधड़ी से जुड़े पाए गए, जिनमें लोगों को क्रिप्टोकरेंसी, शेयर बाजार या ऑनलाइन टास्क के जरिए भारी मुनाफे का झांसा देकर ठगा गया।

पुलिस आयुक्त अनुपम सिंह गहलोत ने बताया कि भारत सरकार की संस्था इडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेन्टर (I4C) द्वारा ‘मनी रिफंड मॉड्यूल (MRM)’ शुरू किया गया है। इसके तहत 50 हजार रुपये तक की फ्रीज राशि को उचित दस्तावेज प्रस्तुत कर पुलिस की प्रक्रिया के माध्यम से वापस प्राप्त किया जा सकेगा।

उन्होंने बताया कि यदि किसी निर्दोष व्यक्ति का बैंक खाता संदिग्ध लेन-देन के कारण फ्रीज हो जाता है, तो वह आवश्यक दस्तावेजों के साथ सीधे बैंक से संपर्क कर सकता है। सत्यापन के बाद बैंक को 50 हजार रुपये तक की राशि वाले खातों को अनफ्रीज करने की अनुमति दी गई है।

पुलिस के अनुसार गिरफ्तार कई आरोपी आदतन अपराधी हैं और अनेक मामलों में उनकी संलिप्तता सामने आई है। ऐसे अपराधियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संगठित अपराध संबंधी धाराओं के तहत कड़ी कार्रवाई की जा रही है।

सूरत पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी आकर्षक निवेश योजना, फर्जी नौकरी, डिजिटल गिरफ्तारी, ऑनलाइन ट्रेडिंग या अधिक मुनाफे के झांसे में न आएं। पुलिस ने स्पष्ट किया कि कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल के माध्यम से धनराशि जमा कराने अथवा गिरफ्तारी से बचाने का दावा नहीं करती।

किसी भी साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में नागरिकों से तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करने तथा आधिकारिक पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने की अपील की गई है।