सूरत : शहर में 16 दिनों में पांच सड़कें धंसीं, नगर निगम ने पांच निर्माण एजेंसियों को थमाए नोटिस
डिंडोली, मोटा वराछा, पूणागाम और उधना-पांडेसरा में सड़क धंसने की घटनाओं से गुणवत्ता पर उठे सवाल; एसएमसी ने जांच शुरू की
सूरत। मानसून की शुरुआत के साथ ही सूरत शहर की सड़कों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पिछले 16 दिनों में शहर के विभिन्न क्षेत्रों में सड़क धंसने की पांच बड़ी घटनाएं सामने आने के बाद सूरत महानगरपालिका (एसएमसी) ने पांच निर्माण एजेंसियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
उल्लेखनीय है कि इन सभी कंपनियों को 10 से 41 वर्षों का इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण का अनुभव है और वे कई बड़े सरकारी प्रोजेक्ट्स का कार्य कर चुकी हैं।
सड़क धंसने की घटनाओं का सिलसिला 16 जून को डिंडोली क्षेत्र से शुरू हुआ, जहां लगभग 100 मीटर लंबी सड़क अचानक धंस गई। हादसे के दौरान वहां से गुजर रहा एक भारी डंपर भी गड्ढे में फंस गया, जिसे हाइड्रोलिक क्रेन की मदद से बाहर निकाला गया।
इसके बाद 30 जून को मोटा वराछा में करीब 700 मीटर लंबी सड़क धंस गई। सड़क धंसने से कई वाहन गड्ढे में फंस गए और आसपास के लोगों में दहशत का माहौल बन गया। इसी दिन पूणागाम के सानिया गांव के पास भी सड़क धंसने से सात वाहन गड्ढे में फंस गए, जिनमें कई व्यावसायिक वाहन भी शामिल थे।
1 जुलाई को उधना-पांडेसरा रोड पर एक बड़ा हादसा टल गया, जब 35 यात्रियों को लेकर जा रही राज्य परिवहन (एसटी) की बस सड़क धंसने से गड्ढे में फंस गई। हालांकि इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई और लंबे समय तक यातायात प्रभावित रहा।
2 जुलाई को डिंडोली के जी-9 सर्किल के पास लगभग 40 मीटर सड़क धंसने की घटना सामने आई। बताया गया कि इस क्षेत्र में हाल ही में ड्रेनेज लाइन का कार्य पूरा हुआ था। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जल्दबाजी में किए गए निर्माण कार्य और उचित रखरखाव के अभाव के कारण मामूली बारिश में ही सड़क धंस गई।
डिप्टी मेयर सुधाकर चौधरी ने स्वीकार किया कि सड़क धंसने की घटना उसी स्थान पर हुई है जहां नई ड्रेनेज लाइन बिछाई गई थी। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता, उपयोग की गई सामग्री और निगरानी की विस्तृत जांच कराई जाएगी। यदि किसी अधिकारी या ठेकेदार की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
एसएमसी ने जिन पांच निर्माण एजेंसियों को नोटिस जारी किए हैं, उनमें पी. दास इंफ्रास्ट्रक्चर, श्री हिंदुस्तान फैब्रिकेटर्स, एसवीआर कंस्ट्रक्शन, सिविलिस इंफ्रा और ए.वी. पटेल कंपनी शामिल हैं।
निगम ने विभिन्न एजेंसियों से अधूरी बैकफिलिंग, बैरिकेडिंग में लापरवाही, पानी का उचित छिड़काव नहीं करने तथा मानसून से पहले कार्य अधूरा छोड़ने जैसे मामलों पर स्पष्टीकरण मांगा है।
नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार, कुछ कंपनियों के पास आईएसओ प्रमाणन है और उन्होंने देश के विभिन्न राज्यों में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पूरे किए हैं। एसवीआर कंस्ट्रक्शन तो अमेरिका के अलबामा में भी एक अंतरराष्ट्रीय परियोजना शुरू करने की तैयारी कर रही है, लेकिन सूरत में उसके निर्माण कार्य की गुणवत्ता सवालों के घेरे में है।
नियमों के अनुसार सड़क निर्माण के बाद 5 से 12 वर्ष तक उसके रखरखाव की जिम्मेदारी संबंधित ठेकेदार की होती है। इस अवधि में सड़क में कोई तकनीकी खामी सामने आने पर उसकी मरम्मत ठेकेदार को ही करनी होती है। बावजूद इसके, मानसून की शुरुआती बारिश में ही लगातार सड़कें धंसने की घटनाओं ने निर्माण गुणवत्ता और रखरखाव व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।
फिलहाल एसएमसी ने संबंधित एजेंसियों के पूर्व कार्यों, टेंडर की शर्तों और निर्माण गुणवत्ता की व्यापक जांच शुरू कर दी है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच के बाद दोषी एजेंसियों पर जुर्माना लगाया जाएगा, उन्हें ब्लैकलिस्ट किया जाएगा या उनके खिलाफ अन्य कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
