सूरत : मोटा वराछा में मिला दुर्लभ फोर्स्टन कैट स्नेक, सुरक्षित रेस्क्यू
डांग के जंगलों में पाई जाने वाली दुर्लभ प्रजाति निर्माण स्थल पर मिली; वन विभाग को दी गई सूचना, विशेषज्ञों ने शहरीकरण के प्रभाव पर जताई चिंता
सूरत। सूरत के मोटा वराछा क्षेत्र में एक निर्माणाधीन स्थल से डांग के जंगलों में पाई जाने वाली दुर्लभ फोर्स्टन कैट स्नेक प्रजाति का सुरक्षित रेस्क्यू किया गया। इस दुर्लभ सांप के शहर में मिलने से वन्यजीव विशेषज्ञों और प्रकृति प्रेमियों में उत्सुकता का माहौल है।
प्राथमिक अनुमान है कि यह सांप निर्माण सामग्री के साथ अनजाने में शहर तक पहुंचा होगा। घटना की जानकारी वन विभाग को दे दी गई है।
निर्माण स्थल पर सांप दिखाई देने की सूचना मिलने पर ओलपाड स्नेक प्रोटेक्शन इंस्टीट्यूट के स्वयंसेवक अक्षय सवजानी मौके पर पहुंचे और सांप को सुरक्षित पकड़ लिया।
निरीक्षण के दौरान उन्हें महसूस हुआ कि यह सांप सूरत क्षेत्र में सामान्य रूप से मिलने वाले कोबरा, रसेल वाइपर, धामन, चेकर्ड किलबैक या वुल्फ स्नेक जैसी स्थानीय प्रजातियों से अलग है।
इसके बाद स्वयंसेवक ने संस्थान के प्रमुख रजनीकांत चौहान को सांप की तस्वीरें भेजीं। प्रारंभिक पहचान फोर्स्टन कैट स्नेक के रूप में की गई, जिसके बाद विभिन्न कोणों से ली गई तस्वीरें अन्य वन्यजीव विशेषज्ञों को भेजी गईं। विशेषज्ञों ने भी इसकी पहचान फोर्स्टन कैट स्नेक के रूप में पुष्टि की। इसके बाद पूरे मामले की सूचना वन विभाग को दी गई।
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, फोर्स्टन कैट स्नेक दक्षिण गुजरात के डांग सहित घने वन क्षेत्रों में पाई जाने वाली अत्यंत दुर्लभ और शर्मीली प्रजाति है। यह प्रायः पेड़ों, झाड़ियों और नम जंगलों में निवास करती है तथा वर्षा ऋतु में अधिक सक्रिय रहती है। ऐसे में सूरत जैसे घनी आबादी वाले शहरी क्षेत्र में इसका मिलना असामान्य माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बारिश, प्राकृतिक आवास में बदलाव अथवा जंगल क्षेत्रों से लाई गई लकड़ी, पत्थर और अन्य निर्माण सामग्री के साथ यह सांप अनजाने में शहर तक पहुंच गया होगा। इससे पहले भी सूरत में गिद्ध और साही जैसे वन्यजीवों के शहरी क्षेत्रों में पहुंचने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
फोर्स्टन कैट स्नेक की प्रमुख विशेषताएं
दक्षिण गुजरात के डांग सहित वन क्षेत्रों में पाई जाने वाली दुर्लभ प्रजाति।
पेड़ों और झाड़ियों वाले नम क्षेत्रों में रहना पसंद करती है।
वर्षा ऋतु में अधिक सक्रिय रहती है।
बड़ी आंखें, बिल्ली जैसी लंबवत पुतलियां और भूरे शरीर पर काले धब्बे इसकी पहचान हैं।
यह पिछली ओर हल्के विष वाली (रियर-फैंग्ड) प्रजाति है और सामान्य परिस्थितियों में इंसानों के लिए घातक नहीं मानी जाती।
वन्यजीव विशेषज्ञों ने नागरिकों से अपील की है कि यदि ऐसी दुर्लभ प्रजाति का सांप दिखाई दे तो घबराएं नहीं और न ही उसे नुकसान पहुंचाने का प्रयास करें। इसकी सूचना तुरंत वन विभाग या प्रशिक्षित स्नेक रेस्क्यू टीम को दें।
विशेषज्ञों का कहना है कि दक्षिण गुजरात में तेजी से हो रहे शहरीकरण और प्राकृतिक आवासों में कमी के कारण वन्यजीवों का मानव बस्तियों की ओर आना बढ़ रहा है। उनका मानना है कि विकास के साथ-साथ जैव विविधता और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवासों के संरक्षण पर भी समान रूप से ध्यान देना आवश्यक है।
