सूरत: तापी नदी के पुनर्जीवन के लिए 25 वर्षीय मास्टर प्लान की मांग, ‘तापी रिवर रिजुविनेशन मिशन’ बनाने का प्रस्ताव

कांग्रेस नेता दर्शन नायक ने प्रधानमंत्री समेत केंद्र और राज्य सरकार को भेजा विस्तृत प्रतिवेदन, वैज्ञानिक अध्ययन, अवैध अतिक्रमण हटाने और रिवर बेसिन मैनेजमेंट लागू करने की उठाई मांग

सूरत: तापी नदी के पुनर्जीवन के लिए 25 वर्षीय मास्टर प्लान की मांग, ‘तापी रिवर रिजुविनेशन मिशन’ बनाने का प्रस्ताव

सूरत: गुजरात प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव दर्शन कुमार ए. नायक ने तापी नदी के समग्र पुनर्जीवन के लिए केंद्र और राज्य सरकार से विशेष "तापी रिवर रिजुविनेशन मिशन" गठित करने तथा आगामी 25 वर्षों के लिए वैज्ञानिक आधार पर मास्टर प्लान लागू करने की मांग की है।

इस संबंध में उन्होंने प्रधानमंत्री, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री, गुजरात के मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और संबंधित विभागों को विस्तृत प्रतिवेदन भेजा है।

दर्शन नायक ने कहा कि दक्षिण गुजरात की जीवनरेखा मानी जाने वाली तापी नदी वर्ष 2006 की विनाशकारी बाढ़ के बाद से सीवेज प्रदूषण, गाद जमाव (सिल्टेशन), नदी तल के सिकुड़ने, अवैध अतिक्रमण, औद्योगिक प्रदूषण, जलभराव और प्राकृतिक जल प्रवाह में बदलाव जैसी गंभीर समस्याओं का सामना कर रही है।

उनका कहना है कि तापी रिवरफ्रंट पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद मानसून के दौरान कई हिस्से जलमग्न हो जाते हैं, जबकि गंदगी और असामाजिक गतिविधियों के कारण आम नागरिक इसका समुचित उपयोग नहीं कर पा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि तापी नदी के संरक्षण को केवल सफाई अभियान तक सीमित रखने के बजाय रिवर बेसिन मैनेजमेंट मॉडल के आधार पर पूरे नदी क्षेत्र के समग्र विकास की आवश्यकता है।

उनका आरोप है कि वर्ष 2006 की बाढ़ के बाद नदी के प्रवाह, कटाव, गाद जमाव और बाढ़ क्षेत्र में आए परिवर्तनों का अब तक कोई व्यापक वैज्ञानिक अध्ययन नहीं कराया गया, जिससे भविष्य में बाढ़ और कटाव का खतरा बढ़ता जा रहा है।

प्रतिवेदन में केंद्र और राज्य सरकार के समक्ष कई महत्वपूर्ण मांगें रखी गई हैं। इनमें तापी नदी के लिए विशेष "तापी रिवर रिजुविनेशन मिशन" का गठन कर 25 वर्षीय मास्टर प्लान तैयार करना, पूरे तापी बेसिन के लिए एकीकृत रिवर बेसिन मैनेजमेंट मॉडल लागू करना, वर्ष 2006 के बाद नदी के प्रवाह, कटाव, गाद और बाढ़ क्षेत्र का वैज्ञानिक अध्ययन कराना तथा ड्रोन, LiDAR और GIS तकनीक के माध्यम से नदी तल के सिकुड़ने और अवैध अतिक्रमण की पहचान कर कार्रवाई करना शामिल है।

इसके अलावा नदी में गाद जमाव का वैज्ञानिक आकलन कर ड्रेजिंग कार्यक्रम लागू करने, जलकुंभी नियंत्रण के लिए स्थायी बायो-मैनेजमेंट और मशीन आधारित सफाई व्यवस्था शुरू करने, केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय, राज्य सरकार, सूरत महानगरपालिका और विशेषज्ञों की संयुक्त "तापी रिवर रिजुविनेशन टास्क फोर्स" गठित करने की भी मांग की गई है।

प्रतिवेदन में सिंगणपोर-रांदर वीयर, लो-लेवल कॉजवे और तापी नदी पर बने विभिन्न पुलों के प्रभाव का स्वतंत्र हाइड्रोलिक ऑडिट कराने, सभी ड्रेनेज आउटफॉल की मैपिंग कर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) की क्षमता बढ़ाने, नदी के जल की गुणवत्ता, प्रदूषण, प्रवाह और गाद की निगरानी के लिए स्मार्ट मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित करने तथा नदी किनारे ग्रीन कॉरिडोर, इको पार्क, साइकिल ट्रैक और जैव विविधता क्षेत्र विकसित करने का भी सुझाव दिया गया है।

दर्शन नायक ने कहा कि जिस प्रकार गंगा नदी के संरक्षण के लिए समग्र और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाया गया है, उसी प्रकार तापी नदी के लिए भी राज्य और राष्ट्रीय महत्व की विशेष परियोजना घोषित कर तत्काल कार्य शुरू किया जाना चाहिए। उनके अनुसार तापी नदी का पुनर्जीवन केवल पर्यावरणीय मुद्दा नहीं, बल्कि दक्षिण गुजरात के लाखों लोगों की जल सुरक्षा, कृषि, जैव विविधता और आर्थिक विकास से सीधे जुड़ा विषय है।

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