सूरत : नासिरनगर तोड़फोड़ मामला, हाई कोर्ट में नगर निगम और पुलिस अधिकारियों की भूमिका पर उठे सवाल
हाई कोर्ट ने पूछा—तोड़फोड़ के दौरान अधिकारी क्या कर रहे थे, जांच के दिए निर्देश. अगली सूनवाई 2 जूलाई को
सूरत। सूरत के नासिरनगर में हुए विवादित तोड़फोड़ मामले में गुजरात हाई कोर्ट की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने बताया कि पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं। सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने सूरत म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (एसएमसी की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी करते हुए अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए।
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने निगम से पूछा कि जब बड़े पैमाने पर मकानों को गिराया जा रहा था, तब संबंधित अधिकारी क्या कर रहे थे। अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि यदि बिजली कंपनी को केवल टेलीफोन के माध्यम से निर्देश दिए गए थे, तो क्या यह कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप था।
कोर्ट ने मौखिक रूप से टिप्पणी करते हुए कहा कि विधि सम्मत प्रक्रिया का पालन किए बिना लोगों के घर कैसे तोड़े जा सकते हैं। अदालत ने यह संकेत भी दिया कि आवश्यकता पड़ने पर वह इस पूरे मामले में स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई करने पर विचार कर सकती है।
राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है। सरकार ने यह भी स्वीकार किया कि जिस समय करीब 150 मकानों को ध्वस्त किया गया, उस दौरान नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारी, पुलिस अधिकारी और बिजली कंपनी के अधिकारी मौके पर मौजूद थे।
सुनवाई के दौरान बिजली कंपनी की ओर से बताया गया कि उन्हें इस कार्रवाई के संबंध में कोई लिखित आदेश नहीं मिला था, बल्कि केवल टेलीफोन पर सूचना दी गई थी। कंपनी के अनुसार, जब उसके अधिकारी मौके पर पहुंचे, तब तक 10 से 15 मकान गिराए जा चुके थे, जिससे कई बिजली मीटर भी क्षतिग्रस्त हो गए थे।
नासिरनगर तोड़फोड़ मामले में न्याय की मांग को लेकर 26 प्रभावित लोगों ने गुजरात हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में राज्य सरकार, सूरत म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (एसएमसी), सूरत पुलिस आयुक्त, SOG के तत्कालीन डीसीपी राजदीपसिंह नकुम, टोरेंट पावर कंपनी सहित अन्य संबंधित पक्षों को प्रतिवादी बनाया गया है।
मामले की अगली सुनवाई 2 जुलाई को निर्धारित कि है। जिसमें जांच की प्रगति और संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर अदालत की निगरानी बनी रहने की संभावना है।
