सूरत : भारी वर्षा के बीच नगर निगम समिति अध्यक्षों-उपाध्यक्षों का पदभार ग्रहण सादगी से संपन्न

नए पदाधिकारियों को समारोह छोड़ मैदान में संभालनी पड़ी जिम्मेदारी

सूरत : भारी वर्षा के बीच नगर निगम समिति अध्यक्षों-उपाध्यक्षों का पदभार ग्रहण सादगी से संपन्न

सूरत। सूरत नगर निगम की विभिन्न समितियों के अध्यक्ष और उपाध्यक्षों की नियुक्ति के बाद प्रस्तावित राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन पर मंगलवार को हुई मूसलाधार बारिश ने पूरी तरह पानी फेर दिया।

रेड अलर्ट के बीच शहर के कई इलाकों में जलभराव और यातायात प्रभावित होने से पदभार ग्रहण समारोह औपचारिकता तक सीमित रह गया। नगर निगम के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने समारोह के बजाय शहर की स्थिति को प्राथमिकता देते हुए नए पदाधिकारियों को भी राहत एवं निगरानी कार्यों में जुटने के निर्देश दिए।

समिति अध्यक्षों और उपाध्यक्षों की नियुक्ति को लेकर कुछ नवनियुक्त पदाधिकारियों के समर्थकों ने एक दिन पहले सोशल मीडिया के माध्यम से बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं और शुभचिंतकों को समारोह में शामिल होने का आह्वान किया था।

इसे राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन के रूप में भी देखा जा रहा था। हालांकि मंगलवार सुबह से शुरू हुई तेज बारिश ने सभी तैयारियों पर पानी फेर दिया।

बारिश के कारण शहर के अनेक क्षेत्रों में जलभराव, ट्रैफिक जाम और नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। ऐसे हालात में नगर निगम के प्रमुख पदाधिकारियों ने समारोह में अधिक समय देने के बजाय राहत कार्यों को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया।

सूत्रों के अनुसार स्टैंडिंग कमेटी के अध्यक्ष के निर्देश पर सभी संबंधित पदाधिकारियों से कहा गया कि वे पदभार ग्रहण की औपचारिकता पूरी करने के बाद अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर वर्षा की स्थिति का जायजा लें तथा अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ मिलकर जलनिकासी एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं की निगरानी करें।

इसके चलते समारोह बेहद सादगीपूर्ण रहा और कुछ ही समर्थकों की मौजूदगी में कुछ मिनटों के भीतर पदभार ग्रहण की प्रक्रिया पूरी कर ली गई। इसके बाद अधिकांश नवनियुक्त अध्यक्ष और उपाध्यक्ष सीधे अपने-अपने क्षेत्रों में रवाना हो गए।

नगर निगम के राजनीतिक गलियारों में चर्चा रही कि जिस समारोह को नए पदाधिकारियों के प्रभाव और जनसमर्थन के प्रदर्शन का अवसर माना जा रहा था, वह प्राकृतिक परिस्थितियों के कारण पूरी तरह फीका पड़ गया।

बारिश ने न केवल आयोजन का स्वरूप बदल दिया, बल्कि नए पदाधिकारियों को पहले ही दिन प्रशासनिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के लिए मैदान में उतरना पड़ा।

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