सूरत : हाई-टेंशन बिजली लाइनों से किसानों को हो रहे नुकसान पर राष्ट्रीय नीति बनाने की मांग

किसान समाज ने प्रधानमंत्री को भेजा ज्ञापन, प्रभावित किसानों के लिए उचित मुआवजा और राहत की उठाई मांग

सूरत : हाई-टेंशन बिजली लाइनों से किसानों को हो रहे नुकसान पर राष्ट्रीय नीति बनाने की मांग

सूरत। सूरत जिले के ओलपाड तालुका सहित राज्य और देशभर के किसानों को हाई-टेंशन पावर टावर एवं ट्रांसमिशन लाइनों से हो रहे नुकसान के मुद्दे को लेकर किसान समाज (गुजरात) ने भारत के प्रधानमंत्री को एक विस्तृत ज्ञापन भेजकर तत्काल प्रभाव से स्पष्ट और न्यायसंगत नीति बनाने की मांग की है।

ज्ञापन में बताया गया है कि कृषि भूमि से गुजरने वाली 66 केवी से लेकर 800 केवी तक की विद्युत ट्रांसमिशन लाइनें और टावर किसानों के लिए आर्थिक, सामाजिक तथा मानसिक समस्याओं का कारण बन रही हैं।

किसान संगठनों का आरोप है कि कई मामलों में किसानों की सहमति के बिना उनकी भूमि का उपयोग किया जा रहा है, जबकि प्रभावित किसानों को पर्याप्त मुआवजा और न्याय नहीं मिल रहा है।

किसान समाज ने केंद्र सरकार से मांग की है कि ट्रांसमिशन लाइनों के लिए ऐसे वैकल्पिक रूट निर्धारित किए जाएं, जिनसे कृषि भूमि को न्यूनतम नुकसान पहुंचे। साथ ही, किसानों को होने वाले नुकसान के आकलन और मुआवजे के लिए पारदर्शी एवं एक समान नीति लागू की जाए।

ज्ञापन में यह भी मांग की गई है कि प्रभावित किसानों को उचित आर्थिक सहायता और स्थायी मुआवजा उपलब्ध कराया जाए। किसान नेताओं का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था में किसानों को उनकी वास्तविक क्षति के अनुरूप राहत नहीं मिल रही है।

खेड़ुत समाज ने केंद्र और राज्य सरकारों से यह भी आग्रह किया है कि जब तक इस विषय पर स्पष्ट नीति तैयार नहीं हो जाती, तब तक नई हाई-टेंशन टावर लाइनों और ट्रांसमिशन परियोजनाओं से संबंधित कार्यों पर रोक लगाई जाए।

इस अवसर पर गुजरात किसान कांग्रेस के अध्यक्ष जयेशभाई पटेल, सुमुल डेयरी के पूर्व निदेशक एवं किसान नेता जयेशभाई पटेल, किसान एवं सहकारी नेता दर्शनभाई नायक, दक्षिण गुजरात किसान समाज के अध्यक्ष रमेशभाई पटेल, मोरथान सरपंच जयेशभाई देसाई, कौशिकभाई देसाई सहित बड़ी संख्या में किसान और किसान संगठन के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

किसान नेताओं ने सरकार से किसानों के हितों की रक्षा करने और इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की है।

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