सूरत में प्री-मानसून कार्यों की खुली पोल, डिंडोली में बीच सड़क फंसा टैंकर
मोटा वराछा, उधना और डिंडोली में लगातार सड़क धंसने की घटनाएं; नगर निगम के कार्यों की गुणवत्ता पर उठे सवाल
सूरत। शहर में मानसून की शुरुआत के साथ ही सूरत महानगरपालिका के प्री-मानसून कार्यों के दावे सवालों के घेरे में आ गए हैं। लगातार तीन दिनों की बारिश के दौरान शहर के विभिन्न क्षेत्रों में सड़क धंसने और ड्रेनेज तथा पेयजल लाइन से जुड़े गड्ढे बैठने की कई घटनाएं सामने आई हैं।
मोटा वराछा, उधना और डिंडोली जैसे क्षेत्रों में सड़कों के क्षतिग्रस्त होने से नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। गुरुवार को डिंडोली स्थित जी-नाइन बिजनेस हब के पास सड़क धंसने से एक पानी का टैंकर बीच सड़क गड्ढे में फंस गया।
हर वर्ष मानसून से पहले करोड़ों रुपये खर्च कर सड़कों की मरम्मत, ड्रेनेज सफाई और आधारभूत ढांचे को मजबूत करने के दावे किए जाते हैं, लेकिन इस वर्ष मानसून के शुरुआती तीन दिनों में ही इन दावों की वास्तविकता सामने आ गई। शहर के विभिन्न हिस्सों में सड़कें धंसने से प्री-मानसून कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
मंगलवार (30 जून) को मोटा वराछा क्षेत्र में सड़क धंसने की घटना सामने आई। इसके अगले दिन बुधवार (1 जुलाई) को उधना बस स्टैंड और डिंडोली गरनाला के समीप मुख्य सड़कें धंस गईं।
गुरुवार (2 जुलाई) को डिंडोली और उधना क्षेत्रों में फिर सड़कें धंसने की घटनाएं हुईं, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ गई। स्थानीय लोगों का आरोप है कि ड्रेनेज और पानी की लाइन बिछाने के बाद सड़कों की समुचित मरम्मत नहीं की गई, जिसके कारण बारिश शुरू होते ही सड़कें बैठने लगीं।
लिंबायत जोन के डिंडोली क्षेत्र स्थित जी-नाइन बिजनेस हब के पास गुरुवार सुबह सड़क का एक हिस्सा अचानक धंस गया। उसी दौरान वहां से गुजर रहा पानी का टैंकर गड्ढे में फंस गया।
टैंकर को बाहर निकालने की कार्रवाई चल ही रही थी कि उधना जोन कार्यालय के समीप 33वें अपार्टमेंट के बाहर भी सड़क का हिस्सा धंस गया। नगर निगम कार्यालय के निकट हुई इस घटना ने निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए।
नगर निगम प्रशासन ने पहले दावा किया था कि यदि किसी निर्माण कार्य के कारण सड़क या खाई धंसती है तो संबंधित ठेकेदार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि अब तक केवल नोटिस जारी करने की औपचारिकता निभाई जा रही है, जबकि खराब गुणवत्ता वाले कार्यों के लिए जिम्मेदार ठेकेदारों और अधिकारियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की जवाबदेही तय नहीं की गई और दोषी ठेकेदारों तथा अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो भविष्य में भी सड़क धंसने जैसी घटनाएं लगातार होती रहेंगी, जिससे जन-धन की हानि का खतरा बना रहेगा।
