सूरत : उधना और लिंबायत में सड़कें धंसीं, बस और स्कूल वैन फंसी

पहली बारिश ने खोली निर्माण कार्यों की पोल, ड्रेनेज व पाइपलाइन कार्यों के बाद सड़क मरम्मत पर उठे सवाल

सूरत : उधना और लिंबायत में सड़कें धंसीं, बस और स्कूल वैन फंसी

सूरत। मानसून की पहली ही बारिश ने सूरत नगर निगम के निर्माण कार्यों और सड़क मरम्मत की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मोटा वराछा में सड़क धंसने की घटना के अगले ही दिन बुधवार को उधना बस स्टेशन और लिंबायत क्षेत्र में भी सड़क धंसने की घटनाएं सामने आईं।

इन घटनाओं में एक एसटी बस और एक स्कूल वैन गड्ढों में फंस गईं। हालांकि किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई, लेकिन यात्रियों और स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।

जानकारी के अनुसार, सुबह हुई भारी बारिश के दौरान उधना बस स्टेशन के बाहर सड़क पर जलभराव हो गया। इसी दौरान वहां से गुजर रही गुजरात राज्य परिवहन निगम (एसटी) की बस का अगला पहिया अचानक सड़क धंसने से बने गड्ढे में फंस गया।

बस में बड़ी संख्या में यात्री सवार थे, जिससे कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। बाद में यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालकर दूसरी बस से उनके गंतव्य के लिए रवाना किया गया।

इसी तरह लिंबायत गरनाला के समीप विद्यार्थियों को लेकर जा रही एक स्कूल वैन भी धंसी हुई सड़क में फंस गई। वैन एक ओर झुक जाने से बच्चों में दहशत फैल गई। स्थानीय लोगों की मदद से वाहन को सुरक्षित बाहर निकाला गया। राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी बच्चे को चोट नहीं पहुंची।

गौरतलब है कि मंगलवार को मोटा वराछा क्षेत्र में भी लगभग 400 मीटर लंबी सड़क धंसने और कई बड़े गड्ढे बनने की घटना सामने आई थी। लगातार दूसरे दिन शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में सड़क धंसने की घटनाओं ने नगर निगम के प्री-मानसून कार्यों और निर्माण गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि नगर निगम द्वारा ड्रेनेज और पानी की पाइपलाइन बिछाने के बाद सड़कों की मरम्मत नियमानुसार और गुणवत्ता के साथ नहीं की जा रही है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद पहली ही बारिश में सड़कें धंसना गंभीर लापरवाही का संकेत है।

नागरिकों ने मांग की है कि केवल गड्ढे भरने तक कार्रवाई सीमित न रखी जाए, बल्कि लापरवाह ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट किया जाए और निर्माण कार्यों की निगरानी में लापरवाही बरतने वाले संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई की जाए।

शहर में मानसून की शुरुआत के साथ ही सड़क धंसने और जलभराव की बढ़ती घटनाओं ने आम लोगों की सुरक्षा और नगर निगम की कार्यप्रणाली को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नगर निगम इन घटनाओं की जिम्मेदारी तय कर गुणवत्ता सुधार के लिए क्या कदम उठाता है।

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