सूरत एयरपोर्ट को विश्वस्तरीय हब बनाने के लिए चैंबर का बड़ा प्रस्ताव, 26 राज्यों के मिनी-इंडिया के लिए सीधी उड़ानों की मांग

AAI के क्षेत्रीय कार्यकारी निदेशक के साथ उच्चस्तरीय बैठक में घरेलू उड़ानों के विस्तार, अंतरराष्ट्रीय कार्गो टर्मिनल, MRO और एयरोट्रोपोलिस विकसित करने की मांग

सूरत एयरपोर्ट को विश्वस्तरीय हब बनाने के लिए चैंबर का बड़ा प्रस्ताव, 26 राज्यों के मिनी-इंडिया के लिए सीधी उड़ानों की मांग

सूरत। सदर्न गुजरात चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (SGCCI) ने सूरत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप विश्वस्तरीय एविएशन हब के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) के पश्चिमी क्षेत्र के क्षेत्रीय कार्यकारी निदेशक पुल्ला हिजकिया के समक्ष विस्तृत प्रस्तुति दी। बैठक सोमवार, 29 जून 2026 को सरसाना स्थित समहति में आयोजित की गई।

बैठक में चैंबर के अध्यक्ष अशोक जीरावाला, मानद मंत्री परेश लाठिया, मानद कोषाध्यक्ष अतुल पटेल, एविएशन एवं एयरपोर्ट समिति के मेंटर रजनीकांत मारफतिया, समिति के चेयरमैन लिनेश शाह, सूरत एयरपोर्ट के निदेशक आनंद शर्मा, एयरपोर्ट अथॉरिटी के वरिष्ठ अधिकारी तथा चैंबर की एविएशन एवं एयरपोर्ट समिति के सदस्य उपस्थित रहे।

बैठक के दौरान अशोक जीरावाला ने कहा कि सूरत में देश के 26 राज्यों के नागरिक रोजगार, उद्योग और व्यापार से जुड़े हुए हैं। ऐसे में इन राज्यों के लिए पर्याप्त घरेलू उड़ान सेवाएं उपलब्ध कराना समय की आवश्यकता है। उन्होंने सूरत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को वैश्विक मानकों के अनुरूप विकसित करने के लिए दीर्घकालिक और व्यापक योजना प्रस्तुत की।

चैंबर ने एयरपोर्ट के समग्र विकास के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—

अंतरराष्ट्रीय एयर कार्गो टर्मिनल की स्थापना।
अप्रोच लाइटिंग सिस्टम एवं एयर नेविगेशन सुविधाओं का आधुनिकीकरण।
समर्पित अंतरराष्ट्रीय यात्री टर्मिनल तथा भविष्य के लिए टर्मिनल विस्तार।
विमान पार्किंग (एप्रन) क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि।
एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस, रिपेयर एवं ओवरहॉल (MRO) सुविधा की स्थापना।
NSOP, MRO, फ्लाइंग ट्रेनिंग एवं जनरल एविएशन गतिविधियों के लिए मौजूदा हैंगर का आधुनिकीकरण।
एयरसाइड इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार और एक साथ अधिक विमानों के संचालन की क्षमता विकसित करना।
रनवे विस्तार तथा हटाए गए लगभग 615 मीटर रनवे हिस्से के पुनः संचालन की योजना।
विजन-2047 के अनुरूप दीर्घकालिक एयरपोर्ट मास्टर प्लान तैयार करना।
एयरोट्रोपोलिस एवं एयरपोर्ट इकोनॉमिक ज़ोन का विकास।
भविष्य की आवश्यकताओं को देखते हुए ग्रीनफील्ड अथवा दूसरे एयरपोर्ट की समयबद्ध योजना।
सार्वजनिक परिवहन, लास्ट माइल कनेक्टिविटी और ट्रैफिक प्रबंधन में सुधार।
स्मार्ट एयरपोर्ट तकनीक, यात्री सुविधाओं और लैंडस्केपिंग का विकास।
सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहनों और वर्षा जल संचयन जैसी ग्रीन एयरपोर्ट पहलों को बढ़ावा देना।
सूरत की आर्थिक क्षमता के अनुरूप एयरपोर्ट विकास की जरूरत

चैंबर ने अपनी प्रस्तुति में कहा कि सूरत देश के सबसे तेजी से विकसित हो रहे आर्थिक केंद्रों में शामिल है। हीरा, टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग, फार्मास्यूटिकल्स, केमिकल्स, MSME, सोलर और सेवा क्षेत्र में शहर की वैश्विक पहचान लगातार मजबूत हो रही है। बढ़ते अंतरराष्ट्रीय व्यापार, निवेश और पर्यटन को देखते हुए विश्वस्तरीय एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर अब अपरिहार्य हो गया है।

प्रस्तुति में जनरल एविएशन सुविधाओं के विस्तार, एविएशन ट्रेनिंग एवं स्किल डेवलपमेंट सेंटर की स्थापना, एयर ट्रैफिक कंट्रोल क्षमता बढ़ाने और अधिक घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के संचालन के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे के विकास पर भी विशेष बल दिया गया।

AAI ने सकारात्मक विचार का दिया भरोसा

AAI के क्षेत्रीय कार्यकारी निदेशक पुल्ला हिजकिया ने चैंबर की व्यावहारिक और दूरदर्शी प्रस्तुति की सराहना करते हुए सभी सुझावों पर सकारात्मक विचार करने का आश्वासन दिया। उन्होंने सूरत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर वर्तमान में चल रही तथा प्रस्तावित विकास परियोजनाओं की जानकारी भी दी और क्षेत्र की बढ़ती आवश्यकताओं के अनुरूप विश्वस्तरीय सुविधाएं विकसित करने के लिए एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया की प्रतिबद्धता दोहराई।

बैठक के अंत में चैंबर ने विश्वास व्यक्त किया कि एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया, नागरिक उड्डयन मंत्रालय, गुजरात सरकार और उद्योग जगत के संयुक्त प्रयासों से सूरत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा आने वाले वर्षों में पश्चिम भारत का प्रमुख अंतरराष्ट्रीय एविएशन, व्यापार और कनेक्टिविटी केंद्र बनकर दक्षिण गुजरात के आर्थिक विकास को नई गति प्रदान करेगा।