सूरत : कैंसर की समय पर पहचान ही बचा सकती है जीवन, जागरूकता सत्र में विशेषज्ञों ने दी अहम सलाह

सदर्न गुजरात चैंबर और नानावटी मैक्स हॉस्पिटल की संयुक्त पहल; विशेषज्ञ बोले—भारत में 70% कैंसर मरीज देर से पहुंचते हैं, गुजरात में ओरल कैंसर के सबसे अधिक मामले

सूरत : कैंसर की समय पर पहचान ही बचा सकती है जीवन, जागरूकता सत्र में विशेषज्ञों ने दी अहम सलाह

सूरत। सदर्न गुजरात चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (SGCCI) और मुंबई के नानावटी मैक्स हॉस्पिटल के संयुक्त तत्वावधान में रविवार को ‘कैंसर केयर बियॉन्ड ट्रीटमेंट: अवेयरनेस, अर्ली डायग्नोसिस एंड क्वालिटी ऑफ लाइफ’ विषय पर जागरूकता सत्र आयोजित किया गया।

नानपुरा स्थित समृद्धि भवन में आयोजित इस कार्यक्रम में कैंसर की समय पर पहचान, उपचार और उपचार के बाद जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने पर विशेषज्ञों ने विस्तार से जानकारी दी।

कार्यक्रम की शुरुआत में चैंबर के अध्यक्ष अशोक जीरावाला ने कहा कि भारत में हर वर्ष 15 लाख से अधिक नए कैंसर मरीज सामने आते हैं। उन्होंने चिंता जताई कि देश में लगभग 70 प्रतिशत कैंसर मरीजों की पहचान तीसरे या चौथे चरण में होती है, जिससे उपचार जटिल हो जाता है।

उन्होंने कहा कि पुरुषों में प्रोस्टेट और गले का कैंसर तथा महिलाओं में स्तन और गर्भाशय का कैंसर अधिक देखा जाता है। यदि कैंसर की पहचान शुरुआती चरण में हो जाए तो अधिकांश मामलों में सफल उपचार संभव है।

हेड एंड नेक ऑन्को सर्जन डॉ. देवेंद्र चौकर ने बताया कि भारत में कुल कैंसर मामलों में लगभग 30 प्रतिशत मरीज गले और मुंह के कैंसर से जुड़े होते हैं, जबकि गुजरात में ओरल कैंसर के सबसे अधिक मामले दर्ज किए जाते हैं।

उन्होंने कहा कि केवल तंबाकू ही नहीं, बल्कि सुपारी, सिगरेट और ई-सिगरेट का सेवन भी कैंसर का प्रमुख कारण बन सकता है।

डॉ. चौकर ने लोगों से अपील की कि यदि मुंह या जीभ का घाव दो से तीन सप्ताह तक ठीक न हो, गले में लगातार दर्द या जलन रहे, आवाज में बदलाव आए, निगलने में परेशानी हो, गर्दन में गांठ महसूस हो या अचानक वजन कम होने लगे तो तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।

प्लास्टिक एवं रिकंस्ट्रक्टिव सर्जन डॉ. भरत सक्सेना ने कहा कि कैंसर का उपचार केवल मरीज की जान बचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उसे सामान्य और आत्मविश्वासपूर्ण जीवन में वापस लाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

उन्होंने बताया कि मुंह और गले के कैंसर की सर्जरी के बाद बोलने, चबाने और निगलने जैसी समस्याओं को दूर करने में रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसके लिए स्किन ग्राफ्ट, फ्लैप सर्जरी और माइक्रोवैस्कुलर सर्जरी जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाता है, जिससे मरीज की कार्यक्षमता और जीवन की गुणवत्ता में सुधार होता है।

कार्यक्रम में चैंबर के पूर्व अध्यक्ष निखिल मद्रासी, मानद मंत्री परेश लाठिया, मानद कोषाध्यक्ष अतुल पटेल, ग्रुप चेयरमैन डॉ. पारुल वडगामा सहित बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।

चैंबर की पब्लिक हेल्थ कमेटी के चेयरमैन डॉ. जगदीश वघासिया ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की, जबकि कमेटी के सह-अध्यक्ष डॉ. राजन देसाई ने पूरे सत्र का संचालन किया। अंत में विशेषज्ञों ने उपस्थित लोगों के प्रश्नों के उत्तर देकर कैंसर से जुड़े विभिन्न भ्रम दूर किए।

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