सूरत : सुमुल डेयरी चुनाव से पहले सियासी घमासान, कांग्रेस ने 'दागी' उम्मीदवारों को टिकट देने और चुनाव प्रक्रिया पर उठाए सवाल
दर्शन नायक का आरोप—धारा-86 की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक किए बिना नामांकन मंजूर, 1,000 करोड़ रुपये के कथित घोटाले को लेकर भाजपा पर निशाना
सूरत। सूरत-तापी डिस्ट्रिक्ट मिल्क प्रोड्यूसर्स कोऑपरेटिव यूनियन लिमिटेड (सुमुल डेयरी) के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है।
गुजरात प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव एवं संघियार मिल्क प्रोड्यूसर्स कोऑपरेटिव सोसायटी के सदस्य दर्शन कुमार ए. नायक ने चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि वर्ष 2015 से 2020 के दौरान कथित तौर पर करीब 1,000 करोड़ रुपये के वित्तीय अनियमितताओं और सत्ता के दुरुपयोग से जुड़े मामलों की जांच के दायरे में रहे कुछ उम्मीदवारों के नामांकन पत्र बिना आवश्यक सत्यापन के स्वीकार कर लिए गए।
दर्शन नायक का आरोप है कि गुजरात कोऑपरेटिव सोसायटीज़ एक्ट की धारा-86 के तहत तैयार जांच रिपोर्ट और उससे जुड़े दस्तावेजों का परीक्षण किए बिना चुनाव अधिकारियों ने संबंधित उम्मीदवारों के नामांकन स्वीकार कर लिए। उनका कहना है कि इस संबंध में उन्होंने पूर्व में भी लिखित आपत्ति दर्ज कराई थी, लेकिन उस पर उचित निर्णय नहीं लिया गया।
कांग्रेस नेता ने यह भी दावा किया कि नवसारी जिला रजिस्ट्रार द्वारा तैयार की गई जांच रिपोर्ट अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है, जिससे पूरे मामले को लेकर पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
दर्शन नायक ने आरोप लगाया कि जिन नेताओं पर कथित वित्तीय अनियमितताओं के दौरान जिम्मेदारी निभाने के आरोप लगते रहे हैं, उन्हें दोबारा चुनाव लड़ने के लिए भारतीय जनता पार्टी का अधिकृत समर्थन दिया गया है। उन्होंने कहा कि इससे पशुपालकों और सहकारी क्षेत्र से जुड़े सदस्यों में असंतोष बढ़ा है।
कांग्रेस ने 16 में से 5 सीटों पर भाजपा समर्थित उम्मीदवारों के निर्विरोध चुने जाने पर भी सवाल उठाए हैं। पार्टी का आरोप है कि विपक्षी उम्मीदवारों पर दबाव, भय और अन्य माध्यमों से प्रभाव डालने के कारण इन सीटों पर मुकाबला नहीं हो सका। हालांकि, इन आरोपों पर भाजपा की ओर से इस बयान में कोई प्रतिक्रिया शामिल नहीं है।
दर्शन नायक ने कहा कि यदि जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं हुई, तो कांग्रेस और सुमुल संघर्ष समिति कानूनी विकल्प अपनाएगी। उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जाएगा और पशुपालकों के हितों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन भी किया जाएगा।
सुमुल डेयरी के चुनाव को लेकर दोनों पक्षों के आरोप-प्रत्यारोप के बीच अब सभी की निगाहें आगामी चुनावी प्रक्रिया और संबंधित अधिकारियों के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।
