सूरत : हाईकोर्ट की फटकार के बाद नगर निगम ने नासिर नगर के बेघर परिवारों को कम्युनिटी हॉल में किया शिफ्ट

28 दिनों तक खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर रहे परिवार; पानी, सफाई और अन्य बुनियादी सुविधाओं की कमी, शिकायत के बाद प्रशासन हरकत में आया

सूरत : हाईकोर्ट की फटकार के बाद नगर निगम ने नासिर नगर के बेघर परिवारों को कम्युनिटी हॉल में किया शिफ्ट

सूरत। कतारगाम दरवाज़ा स्थित नासिर नगर में तोड़फोड़ की कार्रवाई के 28 दिन बाद बेघर हुए परिवारों को आखिरकार अस्थायी आश्रय मिल गया। लंबे समय तक खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर परिवारों के मामले में हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद सूरत महानगरपालिका ने प्रभावित लोगों को कटारगाम स्थित कम्युनिटी हॉल में स्थानांतरित किया।

हालांकि, वहां उपलब्ध कराई गई व्यवस्थाओं को लेकर प्रभावित परिवारों ने गंभीर नाराज़गी जताई है। नासिर नगर में मकान हटाए जाने के बाद से दर्जनों परिवार खुले में रहने को मजबूर थे।

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पुनर्वास और वैकल्पिक व्यवस्था को लेकर नगर निगम से जवाब मांगा था। इसके बाद प्रशासन ने तत्काल कदम उठाते हुए प्रभावित परिवारों को कम्युनिटी हॉल में शिफ्ट किया।

कम्युनिटी हॉल में रहने पहुंचे लोगों का कहना है कि वहां आवश्यक सुविधाओं का अभाव है। प्रभावित परिवारों के अनुसार हॉल में पर्याप्त वेंटिलेशन नहीं होने से गर्मी और उमस के बीच रहना मुश्किल हो रहा है। वहीं, पीने के स्वच्छ पानी, साफ-सफाई और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं की भी कमी बताई गई है।

स्थानीय निवासी जावेद शाह ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद नगर निगम ने उन्हें कम्युनिटी हॉल में स्थान तो दिया, लेकिन शुरुआत में वहां न बिजली की समुचित व्यवस्था थी, न पंखे चल रहे थे और न ही पीने के पानी की सुविधा उपलब्ध थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शौचालयों की स्थिति खराब थी तथा कई जगह पानी भरा हुआ था।

प्रभावित लोगों की शिकायत और कांग्रेस पार्षद अरशद जरीवाला द्वारा इस मुद्दे को उठाए जाने के बाद नगर निगम के अधिकारी और कर्मचारी कम्युनिटी हॉल पहुंचे। इसके बाद बिजली, पंखे, पानी और अन्य आवश्यक सुविधाओं को व्यवस्थित करने की कार्रवाई शुरू की गई।

पूरे घटनाक्रम ने नगर निगम की पुनर्वास व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्रभावित परिवारों को हटाया जाना था, तो उनके लिए पहले से वैकल्पिक आवास और आवश्यक सुविधाओं की समुचित योजना बनाई जानी चाहिए थी। उनका आरोप है कि प्रशासन ने हाईकोर्ट की सख्ती के बाद ही सक्रियता दिखाई।

फिलहाल प्रभावित परिवार कम्युनिटी हॉल में रह रहे हैं और वे पर्याप्त पेयजल, स्वच्छता, स्वास्थ्य तथा अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं। वहीं, मामले को लेकर न्यायालय में सुनवाई भी जारी है।

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