सूरत में 14 इंच बारिश से कारोबार पर भारी मार, हजारों दुकानों में घुसा पानी; करोड़ों का माल बर्बाद

बेसमेंट और ग्राउंड फ्लोर की दुकानें जलमग्न, रेलवे स्टेशन क्षेत्र में 6 से 7 फीट पानी; व्यापारी पंप से निकाल रहे पानी, वाहनों को भी भारी नुकसान

सूरत में 14 इंच बारिश से कारोबार पर भारी मार, हजारों दुकानों में घुसा पानी; करोड़ों का माल बर्बाद

सूरत। एक ही दिन में 14 इंच से अधिक हुई रिकॉर्ड बारिश ने सूरत के व्यापारिक तंत्र को गहरा झटका दिया है। शहर के विभिन्न क्षेत्रों में बेसमेंट और ग्राउंड फ्लोर पर स्थित हजारों दुकानों में पानी भर जाने से करोड़ों रुपये का माल खराब हो गया।

जलस्तर घटने के बाद व्यापारी अब पंपों की मदद से दुकानों से पानी निकालने और नुकसान का आकलन करने में जुटे हैं।

सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में वराछा, भातर, अडाजन, पालनपुर, उधना, लिंबायत, कटारगाम और रेलवे स्टेशन क्षेत्र शामिल हैं। कई व्यापारिक परिसरों और अपार्टमेंट के बेसमेंट में घुटनों से लेकर कमर तक पानी भर गया, जिससे कपड़ा, इलेक्ट्रॉनिक्स, किराना, फर्नीचर, मोबाइल, कॉस्मेटिक्स और अन्य कारोबारियों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।

बारिश के पानी में फ्रिज, कंप्यूटर, मशीनरी तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी डूब गए, जिससे नुकसान का दायरा और बढ़ गया। बुधवार को बारिश का असर कम होने के बाद व्यापारियों ने मोटर पंप, जनरेटर और अन्य उपकरणों की सहायता से पानी निकालने का कार्य शुरू किया। कई स्थानों पर कीचड़ और गंदगी जमा होने के कारण सफाई कार्य भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

रेलवे स्टेशन क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित इलाकों में रहा, जहां लगभग 6 से 7 फीट तक पानी भर गया। स्थानीय लोगों के अनुसार तेज बहाव के कारण भारी लोहे के गर्डर तक बहकर दुकानों के सामने पहुंच गए। इससे इलाके में भारी अव्यवस्था का माहौल बन गया।

जलभराव का असर केवल दुकानों तक सीमित नहीं रहा। कई व्यावसायिक परिसरों के बेसमेंट में खड़ी कारें, दोपहिया वाहन और अन्य वाहन घंटों तक पानी में डूबे रहे। पानी उतरने के बाद भी कई वाहन स्टार्ट नहीं हो सके। वाहन मालिकों को इंजन, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और अन्य पुर्जों के खराब होने की आशंका है।

व्यापारियों का कहना है कि प्राकृतिक आपदा के सामने वे पूरी तरह असहाय हो गए हैं। अनेक व्यापारियों का लाखों रुपये का माल नष्ट हो चुका है। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार शहरभर में व्यापारिक प्रतिष्ठानों को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है।

अब उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती कारोबार को दोबारा पटरी पर लाना और हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई करना है।