ई20 पेट्रोल पर बड़ा खुलासा, एआरएआई रिपोर्ट में सामने आई सच्चाई, क्या पुरानी गाड़ियों के लिए बढ़ सकता है खतरा?

मुंबई, 08 जुलाई (वेब वार्ता)। ई20 पेट्रोल को लेकर बहस तेज हो गई है। कई वाहन मालिक दावा कर रहे हैं कि ब्लेंडेड पेट्रोल की वजह से उनकी गाड़ियों की परफॉर्मेंस प्रभावित हो रही है जबकि सरकार लगातार इसे सुरक्षित बता रही है।

भारत देश में ई20 पेट्रोल को लेकर बहस तेज हो गई है। कई वाहन मालिक दावा कर रहे हैं कि ब्लेंडेड पेट्रोल की वजह से उनकी गाड़ियों की परफॉर्मेंस प्रभावित हो रही है जबकि सरकार लगातार इसे सुरक्षित बता रही है।

इसी बीच ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एआरएआई) की एक रिपोर्ट ने इस चर्चा को और हवा दे दी है। लेकिन अभी इस रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं की गई गया है।

लेकिन टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार और वाहन निर्माता कंपनियों ने इसी अध्ययन के आधार पर देशभर में ई20 पेट्रोल लागू करने का फैसला लिया।

पुरानी गाड़ियों में किन पार्ट्स पर पड़ सकता है असर?

रिपोर्ट में बताया गया है कि ई10 पेट्रोल के लिए बनी पुरानी कारों में इस्तेमाल होने वाले रबर के कुछ हिस्सों जैसे होज, गैस्केट, सील और ओ-रिंग पर लंबे समय में असर पड़ सकता है। समय के साथ ये पार्ट्स घिस सकते हैं और इन्हें बदलने की जरूरत पड़ सकती है।

हालांकि राहत की बात यह है कि रिपोर्ट में धातु से बने इंजन या अन्य प्रमुख पार्ट्स पर किसी तरह का नकारात्मक प्रभाव नहीं पाया गया। वहीं विशेषज्ञों का मानना है कि पुराने वाहनों के मालिकों को समय-समय पर सर्विसिंग और रबर पार्ट्स की जांच कराते रहना चाहिए ताकि किसी संभावित समस्या से बचा जा सके।

टेस्टिंग में क्या सामने आया, माइलेज पर कितना असर?

एआरएआई ने अलग-अलग चारपहिया और दोपहिया वाहनों पर लंबे समय तक टेस्ट किए। एक बीएस-IV इंजन ने ई20 पेट्रोल पर सामान्य प्रदर्शन किया जबकि एक बीएस-VI टर्बो इंजन में 265 घंटे की टेस्टिंग के बाद कुछ तकनीकी दिक्कतें सामने आईं। वहीं एक अन्य कंपनी के इंजन में 809 घंटे की संयुक्त टेस्टिंग के दौरान एग्जॉस्ट वाल्व में थर्मो-मैकेनिकल फेल्योर देखा गया।

हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि किसी एक टेस्ट के आधार पर अंतिम निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा क्योंकि इंजन की विश्वसनीयता जांचने के लिए आमतौर पर करीब 2,000 घंटे तक परीक्षण किए जाते हैं।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि ई20 पेट्रोल इस्तेमाल करने पर ईंधन की खपत करीब 2% से 6% तक बढ़ सकती है। जिसका सीधा मतलब है कि कुछ वाहनों का माइलेज थोड़ा कम हो सकता है।

सरकार और कंपनियों का क्या कहना है?

अप्रैल 2025 से पूरे देश में ई20 पेट्रोल लागू किया जा चुका है और सरकार भविष्य में ई22, ई25, ई27 तथा ई30 जैसे ज्यादा एथेनॉल मिश्रित ईंधन लाने की तैयारी कर रही है।

वहीं मारुति सुज़ुकी, टोयोटा, हुंडई, हीरो मोटोकॉर्प, टीवीएस मोटर, और बजाज ऑटो जैसी कंपनियों का कहना है कि उनके ई20-समर्थित वाहनों की वर्षों तक टेस्टिंग की गई है और सामान्य रखरखाव वाली गाड़ियों में यह ईंधन सुरक्षित है।

इसको लेकर सरकार का दावा है कि ई20 से कच्चे तेल के आयात में कमी, प्रदूषण नियंत्रण और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी। हालांकि पुराने वाहन मालिकों की चिंताएं अभी भी बनी हुई हैं, जिससे इस मुद्दे पर बहस फिलहाल थमती नहीं दिख रही।