सूरत : धर्म, साधना और सनातन परंपरा का स्वर्णिम महीना जुलाई में आएंगे 12 से अधिक प्रमुख व्रत-त्योहार, 25 जुलाई से शुरू होगा चातुर्मास
गुप्त नवरात्रि, भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा, देवशयनी एकादशी और गुरु पूर्णिमा रहेंगे विशेष आकर्षण; देशभर के मंदिरों में होंगे भव्य धार्मिक आयोजन
जुलाई 2026 सनातन धर्म के अनुयायियों के लिए वर्ष के सबसे महत्वपूर्ण और आध्यात्मिक महीनों में से एक रहेगा। इस माह व्रत, पर्व और धार्मिक आयोजनों की लंबी श्रृंखला श्रद्धालुओं को भक्ति, साधना और सेवा से जोड़ने का कार्य करेगी। गुप्त नवरात्रि, भगवान जगन्नाथ की विश्वप्रसिद्ध रथयात्रा, देवशयनी एकादशी, गुरु पूर्णिमा, योगिनी एकादशी, आषाढ़ अमावस्या, प्रदोष व्रत, मासिक शिवरात्रि, कर्क संक्रांति और अन्य पर्व पूरे देश में श्रद्धा एवं उत्साह के साथ मनाए जाएंगे।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार 10 जुलाई को योगिनी एकादशी का व्रत जीवन के पापों और दोषों के निवारण के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है। 12 जुलाई को रवि प्रदोष व्रत और मासिक शिवरात्रि का दुर्लभ संयोग भगवान शिव की आराधना को विशेष फलदायी बनाएगा। 14 जुलाई की आषाढ़ अमावस्या पितृ तर्पण, ध्यान, जप, तप और दान-पुण्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण रहेगी।
15 जुलाई से 23 जुलाई तक गुप्त नवरात्रि के दौरान मां आदिशक्ति की आराधना, दुर्गा सप्तशती का पाठ, मंत्र-जाप, उपवास और शक्ति साधना का विशेष महत्व रहेगा। यह पर्व केवल तांत्रिक साधना तक सीमित नहीं है, बल्कि सामान्य श्रद्धालु भी सात्विक जीवन, भक्ति और संयम के माध्यम से माता की कृपा प्राप्त कर सकते हैं।
16 जुलाई से 24 जुलाई तक भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा पूरे देश में आस्था का केंद्र रहेगी। पुरी सहित अनेक शहरों में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की रथयात्राएं निकाली जाएंगी। भगवान का रथ खींचना और दर्शन करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। इसी दिन सूर्य के कर्क राशि में प्रवेश के साथ कर्क संक्रांति भी मनाई जाएगी।
22 जुलाई की भड़ली नवमी मांगलिक कार्यों के लिए अंतिम प्रमुख अबूझ मुहूर्त मानी जाती है। इसके बाद 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी के साथ भगवान विष्णु योगनिद्रा में प्रवेश करेंगे और चातुर्मास प्रारंभ हो जाएगा। अगले चार महीनों तक विवाह, गृहप्रवेश, मुंडन और अन्य मांगलिक कार्य स्थगित रहेंगे, जबकि जप, तप, दान, सत्संग और सेवा कार्यों का महत्व कई गुना बढ़ जाएगा।
माह का समापन 29 जुलाई को गुरु पूर्णिमा के साथ होगा। महर्षि वेदव्यास को समर्पित यह पर्व गुरु-शिष्य परंपरा, ज्ञान, संस्कार और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक माना जाता है। इस अवसर पर देशभर में गुरु पूजन, प्रवचन, सत्संग और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
ज्योतिष, वास्तु एवं हस्तरेखा विशेषज्ञ गोविंद मुंदड़ा ने कहा कि जुलाई का महीना प्रत्येक व्यक्ति के लिए आत्मचिंतन, संयम और आध्यात्मिक उन्नति का अवसर है। उन्होंने श्रद्धालुओं से इस अवधि में नियमित पूजा-पाठ, मंत्र-जाप, दान, गौसेवा, वृक्षारोपण, अन्नदान और जरूरतमंदों की सेवा करने का आह्वान किया। उनके अनुसार चातुर्मास केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि स्वयं के व्यक्तित्व, विचार और जीवन को सकारात्मक दिशा देने का चार माह का आध्यात्मिक अभियान है।
