सूरत : नायलॉन, विस्कोस और स्पैन्डेक्स यार्न पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी नहीं लगाने के फैसले का एसजीसीसीआई ने किया स्वागत
कच्चे माल की उपलब्धता बनी रहेगी, टेक्सटाइल उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता और रोजगार को मिलेगा बड़ा सहारा : अशोक जीरावाला
सूरत: दक्षिण गुजरात चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (एसजीसीसीआई) ने केंद्र सरकार द्वारा नायलॉन फिलामेंट यार्न (एनएफवाय), विस्कोस फिलामेंट यार्न (वीएफवाय) और स्पैन्डेक्स यार्न के आयात पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी (एडीडी) नहीं लगाने के निर्णय का स्वागत किया है। चैंबर ने इसे सूरत समेत देश की संपूर्ण टेक्सटाइल वैल्यू चेन के लिए बड़ी राहत बताया है।
डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ ट्रेड रेमेडीज़ (डीजीटीआर) ने मार्च 2026 में इन यार्न पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाने की सिफारिश की थी। हालांकि, वित्त मंत्रालय ने इन सिफारिशों को स्वीकार नहीं किया और निर्धारित समयसीमा समाप्त होने तक कोई अधिसूचना जारी नहीं की। इससे स्पष्ट हो गया कि केंद्र सरकार ने इन उत्पादों पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी लागू नहीं करने का निर्णय लिया है।
एसजीसीसीआई ने लगातार केंद्र सरकार के समक्ष यह मुद्दा उठाया था कि नायलॉन, विस्कोस और स्पैन्डेक्स यार्न पर अतिरिक्त शुल्क लगाए जाने से सूरत और दक्षिण गुजरात की विशाल टेक्सटाइल इंडस्ट्री सहित पूरे देश के डाउनस्ट्रीम टेक्सटाइल सेक्टर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
चैंबर ने सरकार को अवगत कराया था कि ये यार्न साड़ियों, ड्रेस मटेरियल, फैब्रिक्स, स्ट्रेचेबल गारमेंट्स, टेक्निकल टेक्सटाइल और अन्य वैल्यू-एडेड उत्पादों के निर्माण में व्यापक रूप से उपयोग किए जाते हैं।
चैंबर के अनुसार, एंटी-डंपिंग ड्यूटी लागू होने से उत्पादन लागत बढ़ने, भारतीय उत्पादकों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता कम होने, निर्यात प्रभावित होने और रोजगार पर नकारात्मक असर पड़ने की आशंका थी।
एसजीसीसीआई के अध्यक्ष अशोक जीरावाला ने कहा कि नायलॉन फिलामेंट यार्न, विस्कोस फिलामेंट यार्न और स्पैन्डेक्स यार्न पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी नहीं लगाने का निर्णय टेक्सटाइल उद्योग के लिए अत्यंत सकारात्मक है।
इससे प्रतिस्पर्धी कीमतों पर कच्चे माल की उपलब्धता बनी रहेगी, उत्पादन लागत नियंत्रित रहेगी, निर्यात को प्रोत्साहन मिलेगा और लाखों लोगों को रोजगार देने वाले टेक्सटाइल उद्योग की विकास गति मजबूत होगी।
उन्होंने कहा कि नायलॉन उद्योग से जुड़े मुद्दे पर एसजीसीसीआई ने केंद्र सरकार को यह भी सुझाव दिया है कि आयात पर अतिरिक्त शुल्क लगाने के बजाय नायलॉन उद्योग के प्रमुख कच्चे माल कैप्रोलैक्टम की उपलब्धता और घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर ध्यान दिया जाना चाहिए। इससे पूरी नायलॉन वैल्यू चेन को आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिलेगी।
अशोक जीरावाला ने टेक्सटाइल मंत्रालय और वित्त मंत्रालय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि दोनों मंत्रालयों ने उद्योग जगत की वास्तविक चिंताओं को गंभीरता से समझते हुए संतुलित और दूरदर्शी निर्णय लिया है।
उन्होंने गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी का भी विशेष धन्यवाद किया और कहा कि उन्होंने समय रहते इस मुद्दे को केंद्र सरकार के समक्ष प्रभावी ढंग से उठाकर गुजरात की टेक्सटाइल इंडस्ट्री की आवाज़ पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
चैंबर ने कहा कि वह भविष्य में भी टेक्सटाइल उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता, निर्यात वृद्धि, रोजगार सृजन और उद्योग हितों से जुड़े मुद्दों पर सरकार के समक्ष प्रभावी रूप से अपनी बात रखता रहेगा।
