बुजुर्ग पेंशनर्स के लिए घर बैठे लाइफ सर्टिफिकेट बनाने की सुविधा, मोबाइल ऐप के जरिए मिनटों में पूरा होगा सत्यापन
हैदराबाद, 29 जून (वेब वार्ता)। पेंशनभोगियों को अपनी पेंशन निर्बाध रूप से प्राप्त करने के लिए हर साल जीवन प्रमाण पत्र जमा करना होता है। अब बुजुर्गों को बैंक या सरकारी कार्यालयों की लंबी कतारों में लगने की जरूरत नहीं है।
केंद्र सरकार की डिजिटल पहल के तहत, पेंशनर्स अब अपने स्मार्टफोन पर ‘जीवन प्रमाण’ या ‘उमंग’ ऐप का उपयोग करके घर बैठे ही मात्र कुछ मिनटों में अपना डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र (डीएलसी) जनरेट कर सकते हैं। यह तकनीक विशेष रूप से अस्वस्थ और दिव्यांग पेंशनभोगियों के लिए अत्यंत सुविधाजनक है।
फेस ऑथेंटिकेशन से सरल हुई प्रक्रिया
डिजिटल प्रक्रिया को और भी सुगम बनाने के लिए सरकार ने ‘फेस ऑथेंटिकेशन’ तकनीक लागू की है। अब इसके लिए किसी बाहरी बायोमेट्रिक या फिंगरप्रिंट स्कैनर डिवाइस की आवश्यकता नहीं है।
पेंशनर्स को बस अपने एंड्रॉइड फोन में ‘आधार फ़ेसआरडी’ ऐप के साथ ‘जीवन प्रमाण’ या ‘उमंग’ ऐप इंस्टॉल करना होगा। आवेदन के लिए, पीपीओ नंबर, बैंक खाता विवरण और एक सक्रिय मोबाइल नंबर की आवश्यकता होती है। चेहरे को कैमरे के सामने स्कैन करते ही सत्यापन प्रक्रिया पूरी हो जाती है।
तत्काल डिजिटल रसीद की उपलब्धता
प्रक्रिया पूरी होते ही पेंशनभोगी के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर एक पुष्टिकरण संदेश प्राप्त होता है। इसके साथ ही, पेंशनर्स अपनी ‘प्रमाण आईडी’ का उपयोग करके डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र की पीडीएफ कॉपी आसानी से डाउनलोड कर सकते हैं।
यह डिजिटल प्रमाण पत्र सीधे संबंधित पेंशन वितरण एजेंसी को भेज दिया जाता है, जिससे भौतिक दस्तावेजों की भागदौड़ समाप्त हो गई है। यह सुविधा पेंशनभोगियों को कड़ाके की ठंड और शारीरिक परेशानी से बचाते हुए एक सुरक्षित और पारदर्शी अनुभव प्रदान करती है।
