सूरत : ALMM-II नियमों पर साउथ गुजरात के सोलर उद्योग की चिंता, चैंबर ने केंद्र से 18 माह की मोहलत देने की मांग उठाने का दिया भरोसा
सोलर पैनल निर्माता और EPC कॉन्ट्रैक्टर्स बोले—नए नियमों से उत्पादन, रोजगार और निवेश पर संकट; चैंबर अध्यक्ष अशोक जीरावाला ने प्रधानमंत्री तक उद्योग की आवाज पहुंचाने का आश्वासन दिया
सूरत। सदर्न गुजरात चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (एसजीसीसीआई) के सरसाना स्थित कार्यालय में शुक्रवार को दक्षिण गुजरात के सोलर पैनल निर्माताओं, ईपीसी कॉन्ट्रैक्टर्स और प्रोजेक्ट डेवलपर्स के साथ हाइब्रिड मोड में बैठक आयोजित की गई।
बैठक में केंद्र सरकार द्वारा 1 जून 2026 से लागू किए गए उस प्रावधान पर विस्तार से चर्चा हुई, जिसके तहत केवल ALMM-II (Approved List of Models and Manufacturers) में सूचीबद्ध घरेलू सोलर सेल निर्माताओं के उत्पादों का उपयोग अनिवार्य किया गया है।
बैठक में उद्योग प्रतिनिधियों ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में ALMM-II व्यवस्था को लागू करने से सोलर उद्योग के समक्ष गंभीर चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। उन्होंने एकमत से मांग की कि MNRE की ALMM-II सूची के अनिवार्य क्रियान्वयन पर कम से कम 18 महीने के लिए रोक लगाई जाए, ताकि उद्योग को आवश्यक तैयारी का समय मिल सके।
बैठक में उद्योग जगत ने बताया कि पिछले वर्ष देश में लगभग 60 गीगावाट की डीसी क्षमता स्थापित की गई थी, जबकि ALMM-I सूची में शामिल मॉड्यूल निर्माताओं की कुल स्थापित क्षमता लगभग 170 गीगावाट है। इसके मुकाबले घरेलू सोलर सेल उत्पादन क्षमता करीब 28.5 गीगावाट बताई जा रही है, जो मांग की तुलना में अपर्याप्त है।
प्रतिनिधियों ने यह भी कहा कि ALMM-II सूची में शामिल अधिकांश सोलर सेल निर्माता स्वयं सोलर मॉड्यूल भी तैयार करते हैं। ऐसे में स्वतंत्र मॉड्यूल निर्माताओं को पर्याप्त मात्रा में सेल उपलब्ध होने तथा प्रतिस्पर्धी कीमत पर मिलने को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। उनका कहना था कि इससे छोटे और मध्यम उद्योगों की उत्पादन लागत बढ़ेगी और उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता प्रभावित होगी।
बैठक में यह मुद्दा भी उठाया गया कि वर्तमान में सूचीबद्ध कुल क्षमता में से TOPCon तकनीक वाले सोलर सेल की क्षमता लगभग 13.56 गीगावाट है, जबकि शेष क्षमता पुरानी मोनो पीईआरसी तकनीक की है।
उद्योग प्रतिनिधियों का कहना था कि वैश्विक बाजार में TOPCon तकनीक की मांग अधिक है, इसलिए आधुनिक तकनीक की उपलब्धता सीमित होने से भारतीय उद्योग प्रभावित हो सकता है।
प्रतिनिधियों ने दावा किया कि इन परिस्थितियों के कारण दक्षिण गुजरात में कई सोलर पैनल निर्माण इकाइयों का उत्पादन प्रभावित हुआ है तथा ईपीसी क्षेत्र में लगभग 500 मेगावाट क्षमता के प्रोजेक्ट रद्द हुए हैं।
उनके अनुसार, केवल दक्षिण गुजरात में ही करीब 1,500 करोड़ रुपये के अनुबंध प्रभावित हुए हैं। उद्योग जगत का यह भी कहना है कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो गुजरात में लगभग 2 लाख तथा देशभर में करीब 15 लाख लोगों के रोजगार पर असर पड़ सकता है।
बैठक को संबोधित करते हुए चैंबर के अध्यक्ष अशोक जीरावाला ने उद्योग प्रतिनिधियों की सभी बातों को गंभीरता से सुना और भरोसा दिलाया कि चैंबर इस मुद्दे को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष उठाएगा।
उन्होंने कहा कि भारत ने 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य निर्धारित किया है, ऐसे में ऐसी नीतियों की आवश्यकता है जो उत्पादन क्षमता और उद्योग दोनों को मजबूत करें।
उन्होंने कहा कि देश के लगभग 60 प्रतिशत सोलर पैनल निर्माता गुजरात में स्थित हैं और उनमें से लगभग 70 प्रतिशत दक्षिण गुजरात में कार्यरत हैं। इसलिए इस नीति का सबसे अधिक प्रभाव दक्षिण गुजरात के उद्योग पर पड़ने की आशंका है।
अंत में श्री जीरावाला ने उद्योग प्रतिनिधियों को आश्वस्त किया कि चैंबर सोलर पैनल निर्माताओं और ईपीसी क्षेत्र से जुड़े उद्यमियों के हितों की रक्षा तथा उनकी समस्याओं के समाधान के लिए हरसंभव प्रयास करेगा।
