सूरत : मुक्तिधामों में पार्थिव देह का होगा गंगाजल एवं तुलसी समिधा से दिव्य संस्कार

जीण माता सेवा संघ की अनूठी पहल, मृत आत्माओं के कल्याण एवं मोक्ष हेतु शुरू की गई सेवा श्रृंखला

सूरत : मुक्तिधामों में पार्थिव देह का होगा गंगाजल एवं तुलसी समिधा से दिव्य संस्कार

श्री अखिल भारतीय जीण माता सेवा संघ, सूरत द्वारा पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर मृत आत्माओं के कल्याण एवं मोक्ष की भावना से एक अनूठी सेवा श्रृंखला का शुभारंभ किया गया। रविवार को प्रारंभ हुई इस पहल के तहत शहर के विभिन्न मुक्तिधामों में अंतिम संस्कार के लिए आने वाली पार्थिव देहों के परिजनों को निशुल्क गंगाजल एवं तुलसी समिधा उपलब्ध कराई जाएगी।

कार्यक्रम संयोजक राजेश काबरा एवं विजय अग्रवाल ने संयुक्त रूप से जानकारी देते हुए बताया कि सूरत के प्रमुख मुक्तिधामों—उमरा, अश्विनी कुमार, कुरुक्षेत्र तथा लिंबायत—में प्रतिदिन अग्नि संस्कार के लिए आने वाली पार्थिव देहों के परिजनों को हरिद्वार से विशेष रूप से मंगवाया गया गंगाजल तथा तुलसी समिधा भेंट की जाएगी। यह व्यवस्था संबंधित मुक्तिधाम समितियों के माध्यम से की जाएगी।

इस सेवा अभियान का शुभारंभ उमरा मुक्तिधाम से किया गया, जहां जीण माता सेवा संघ की ओर से मुक्तिधाम के प्रबंधक जयेशभाई को 108 गंगाजल पात्र एवं तुलसी समिधा भेंट कर कार्यक्रम की मंगलमय शुरुआत की गई।

संघ के संस्थापक शरद खंडेलवाल ने इस पहल के पौराणिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि राजा भागीरथ अपने पूर्वजों की आत्माओं के मोक्ष एवं कल्याण के लिए मां गंगा को भगवान शिव के माध्यम से पृथ्वी पर लेकर आए थे। गंगा के पवित्र जल से उनके पूर्वजों को मोक्ष की प्राप्ति हुई। इसी पौराणिक प्रेरणा को ध्यान में रखते हुए जीण संघ द्वारा सूरत के सभी मुक्तिधामों को निशुल्क गंगाजल पात्र उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

संघ के बद्री प्रसाद अग्रावत ने बताया कि पद्म पुराण में वर्णित मान्यता के अनुसार यदि किसी जीवात्मा का अग्नि संस्कार तुलसी समिधा के साथ किया जाए तो उसे प्रभु चरणों की प्राप्ति होती है। इसी धार्मिक मान्यता को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक गंगाजल पात्र के साथ तुलसी समिधा भी संलग्न की गई है।

संघ पदाधिकारियों का मानना है कि यह अपने प्रकार का एक अनूठा एवं दिव्य प्रयास है, जो संभवतः देश में पहली बार इतने व्यापक स्तर पर क्रियान्वित किया जा रहा है। इस सेवा कार्य को सफल बनाने में विजय अग्रवाल, सौरभ अग्रवाल, राजेश काबरा एवं बद्री प्रसाद अग्रावत का विशेष योगदान रहा।

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