सूरत : SGCCI की मांग पर केंद्र सरकार का फैसला, MEG और PTA पर कस्टम ड्यूटी राहत 15 जुलाई तक बढ़ी
टेक्सटाइल उद्योग को राहत; पॉलिएस्टर एवं MMF सेक्टर की उत्पादन लागत कम होने की उम्मीद
सूरत। सदर्न गुजरात चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (SGCCI) की मांग पर केंद्र सरकार ने मोनो एथिलीन ग्लाइकॉल (MEG) और प्यूरिफाइड टेरेफ्थेलिक एसिड (PTA) पर कस्टम ड्यूटी में दी गई राहत की अवधि 15 जुलाई, 2026 तक बढ़ा दी है।
इस निर्णय से विशेष रूप से सूरत की पॉलिएस्टर एवं मैन-मेड फाइबर (MMF) आधारित टेक्सटाइल इंडस्ट्री को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
चैंबर ने 24 जून, 2026 को सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्सेज एंड कस्टम्स (CBIC) के चेयरमैन को पत्र लिखकर MEG और PTA पर कस्टम ड्यूटी राहत की अवधि बढ़ाने की मांग की थी।
इसके बाद वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग ने अधिसूचना G.S.R. 529(E) जारी करते हुए 1 अप्रैल, 2026 की अधिसूचना संख्या 13/2026-कस्टम्स में संशोधन किया है। संशोधित अधिसूचना के अनुसार, पहले 30 जून, 2026 तक लागू यह राहत अब 15 जुलाई, 2026 तक प्रभावी रहेगी।
SGCCI के अनुसार, पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक परिस्थितियों के कारण कच्चे तेल और उससे जुड़े उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। इसका सीधा असर पॉलिएस्टर उद्योग में उपयोग होने वाले प्रमुख कच्चे माल MEG और PTA की कीमतों पर पड़ा।
हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्थिति में कुछ सुधार हुआ है, लेकिन भारतीय बाजार में क्रूड आधारित कच्चे माल की कीमतों में अपेक्षित कमी नहीं आई है। इसके चलते पॉलिएस्टर और MMF क्षेत्र की विनिर्माण इकाइयों पर उत्पादन लागत का अतिरिक्त दबाव बना हुआ है।
चैंबर ने केंद्र सरकार से आग्रह किया था कि कस्टम ड्यूटी राहत की अवधि बढ़ाई जाए, ताकि उद्योगों को कच्चे माल की लागत नियंत्रित रखने में सहायता मिले और वे घरेलू एवं वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बने रह सकें।
SGCCI का मानना है कि सरकार के इस निर्णय से उत्पादन लागत कम होगी, उद्योगों के कार्यशील पूंजी (वर्किंग कैपिटल) पर दबाव घटेगा तथा निर्यात और घरेलू बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता मजबूत होगी।
चैंबर ने उद्योग की मांगों पर त्वरित एवं सकारात्मक निर्णय लेने के लिए केंद्र सरकार, वित्त मंत्रालय (राजस्व विभाग) और CBIC का आभार व्यक्त किया है। साथ ही कहा है कि दक्षिण गुजरात के व्यापार और उद्योग से जुड़े मुद्दों को भविष्य में भी सरकार के समक्ष प्रभावी ढंग से उठाकर उद्योगों के हितों की रक्षा के लिए चैंबर लगातार प्रयास करता रहेगा।
