आखिर क्या है हेलिपोर्ट? जानें गुजरात में कहाँ कहाँ बनाए जा रहे है और क्या है इसे बनाने का खर्च

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इमर्जन्सी के समय में राहत और बचाव कार्य में उपयोगी साबित हो सकती है हेलिपोर्ट सुविधा, प्रवासन उद्योग को भी मिलेगा फायदा

गुजरात के सभी तालुका में हेलिपेड़ बनाने का काम चल रहा है। इसके अलावा राज्य में 6 स्थल ऐसे है जहां सरकार हेलिपोर्ट डेवलप कर रही है। हर हेलिपोर्ट के पीछे 20 करोड़ रुपए का खर्च किया जा रहा है। बता दे की पिछले साल से ही यह काम शुरू कर दिया गया है। 
नागरिक उड्डयन विभाग के सूत्रों ने बताया हेलिपोर्ट या हेलिड्रोम एक ऐसी व्यवस्था है, जहां हेलिकॉप्टर या अन्य वर्टिकल लिफ्ट प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जाता है। जिसका इस्तेमाल दूर के इलाकों, शहर के बीच आने जाने और इमर्जन्सी के दौरान राहत और बचाव के कार्य के लिए किया जा सकता है। नागरिक उड्डयन विभाग ने कुल 6 जगह हेलिपोर्ट बनाने का आदेश दिया है। जिसमें अहमदाबाद, सोमनाथ, द्वारका, अंबाजी, सापुतारा और गिर सोमनाथ का समावेश होता है। 
हेलिपोर्ट को बनाने के लिए काफी कम जमीन की जरूरत होती है। एक हेलिपोर्ट बनाने के लिए आठ एकर जमीन की ही जरूरत पड़ती है। इसके अलावा इसका इन्फ्रास्ट्रचर खर्च भी काफी कम होता है। हेलिपोर्ट तमाम सुविधा दे सकता है। जिसमें RMO सेवा, स्मोल टर्मिनल बिल्डिंग, एटीसी टावर, ओपरेशनल एरिया, फायर एंड एम्ब्युलेंस और अन्य भी सुविधा का समावेश होता है। 
नागरिक उड्डयन मंत्रालय द्वारा पहले साल अहमदाबाद, सोमनाथ और अंबाजी में यह सेवा शुरू की जाएगी। यह स्थल प्रवासन दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण होने के नाते सबसे पहले यहाँ हेलिपोर्ट की सेवा शुरू की जाएगी। जिसके बाद अन्य स्थलों पर यह सेवा शुरू की जाएगी। इन 6 स्थलों पर हेलिपोर्ट की सेवा शुरू करने के बाद अन्य स्थलों पर भी ऐसी ही सेवा शुरू करने के बारे में आवेदन दिया जाएगा। 

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