वडोदरा की यह युवती उठाएगी 10 हजार छात्राओं की 1 करोड़ की फीस भरने की ज़िम्मेदारी

(Photo Credit :divyabhaskar.co.in)

पिता के पदचिन्हों पर चलकर अपने खर्चे से उठा रही है बच्चों की पढ़ाई का खर्चा, दाताओं की भी मिल रही है मदद

मनुष्य को हर समय अपने से अधिक जरूरतमंद लोगों की मदद करनी चाहिए। यह बात है तो काफी छोटी पर यदि हर कोई इसे अपने जीवन में उतार ले तो सभी क भला हो सकता है। बस इसी बात को अपने जीवन में उतारा वडोदरा की एक युवती ने जो पिछले दस साल से गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों की बेटियों की फीस क खर्च उठा रही है। हजारों बेटियों के जीवन में ज्ञान की ज्योति जलाने में अमूल्य योगदान देने वाली युवती का नाम निशिता राजपूत है। इस साल भी निशिता ने साल भर में 10 हजर से अधिक लड़कियों की 1 करोड़ की मदद करने क निर्णय लिया है।
10 साल पहले बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान के अंतर्गत निशा ने यह अभियान शुरू किया था। जिसमें पहले साल उसने 151 लड़कियों की स्कूल फीस भरी थी। फिलहाल वह 34 हजार से भी अधिक लड़कियों की फीस भर चुकी है। सामाजिक कार्यकर्ता निशिता ने इस साल भी कोरोना महामारी के बीच भी 55 लाख रुपए की सहायता की थी। निशिता ने बताया की वह इसके लिए डोनर्स से एक हजार का चेक लेती है। जिसे वह स्कूल में जमा करवा देती है। 
चेक देने वाले दाताओं को छात्र का नाम, छात्र का परिणाम, छात्र की फोटो, माता-पिता का विवरण, चेक विवरण सहित सभी प्रकार की जानकारी दी जाती है। ताकि डोनर को भी पता चले कि वह किस बेटी को पढ़ा रहा है। इसके लिए कमजोर वर्ग आर्थिक परिस्थिति और पिछड़े वर्ग की लड़कियों को प्राथमिकता दी जाती है।  पिता गुलाबसिंह राजपूत के पदचिन्हों पर चलकर बेटी निशिता अपने खर्चे से हजारों बेटियों की पढ़ाई में मदद कर रही है। इससे पहले निशिता ने यह भी कहा था कि दूर-दराज के इलाकों में रहने वाली बेटियां वर्तमान में पढ़ाई का खर्चा ज्यादा होने के कारण पढ़ाई नहीं कर पाती हैं।
माता-पिता उच्च कक्षा में होने वाले खर्चों को वहन नहीं कर पाते। ऐसे कई परिवारों में बेटी की ख्वाहिश आगे पढ़ने की होती है, बेटी भी काबिल होती है लेकिन पैसों की कमी के कारण नहीं भर पाती। वह अधिक से अधिक लोगों को सहायता करने का प्रयास कर रही है। निशिता द्वारा हाल ही में कक्षा 10 और 12 के छात्रों को नए मोबाइल फोन भी दिए गए थे। इसके अलावा छात्रों के बैंक खाते में 5000 रुपये की एफ़डी भी फिक्स की थी। साथ ही महिला सशक्तिकरण के लिए बहनों को रोजगार भी प्रदान किया जाता है। यह उन बुजुर्गों को भी मुफ्त टिफिन सेवा प्रदान कर रहा है जो पिछले चार वर्षों से बिना जीवनसाथी के एकांत जीवन जी रहे हैं।

इन टॉपिक्स पर और पढ़ें:


ये भी पढ़ें