10 दिन पहले मर चुके मरीज को भी जिंदा बता रहा है सिविल का कोरोना हेल्प डेस्क

केस पेपर खो जाने के कारण महारानीदिन को अंजान मानकर लाश को रख दिया पोस्ट्मॉर्टेम रूम में

दक्षिण गुजरात की सबसे बड़ी माने जाने वाले सिविल हॉस्पिटल में कोरोना मरीजों के उपचार के दौरान कई लापरवाही की जानकारी सामने आ चुकी है। ऐसी ही एक लापरवाही फिर से सामने आ रही है। जिसमें की गोड़ादरा के युवक ने अपने पिता को सिविल में दाखिल किया था इसके बाद वह खुद भी कोरोनाग्रस्त हो जाने के कारण उसे होम आइसोलेट कर दिया गया। जब वह होम आइसोलेशन में से निकला और अपने पिता की जानकारी लेने सिविल अस्पताल पहुंचा दो उसे पिता के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल सकी।
परेशान युवक ने पिता को ढूंढने के लाखों प्रयास किए लेकिन कोई जानकारी नहीं मिल सकी। इसके पहले जब अपने घर से सिविल हॉस्पिटल के हेल्प डेस्क पर फोन करता था तब उसे उसके पिता का उपचार चल रहे होने की जानकारी दी जाती थी लेकिन, जब सिविल में खुद जांच करने पहुंचा तो पिता की कोई जानकारी नहीं मिल रही थी। जिससे कि कंटालकर खटोदरा पुलिस स्टेशन गया। पुलिस स्टेशन में पता चला कि उसके पिता की उपचार के तीसरे दिन ही मौत हो गई। मतलब कि 9 तारीख को उसके पिता दाखिल किए गए थे और 12 तारीख को उनकी मौत हो गई थी। यह जानकर उसके बेटे के पैरों तले जमीन तक गई। वह पोस्टमार्टम रूम में अपने पिता की पहचान के लिए पहुंचा जहां कि उसने अपने पिता के अंतिम दर्शन किए। 
सिविल हॉस्पिटल में इस तरह की लापरवाही के कारण सभी लोगों को परेशान होना पड़ रहा है। गोड़ादरा के वृंदावन सोसायटी में रहने वाले महारानी दीन अंबिका प्रसाद तिवारी को 9 तारीख हॉस्पिटल में एडमिट किया गया। उसी दिन उन्हें पुरानी बिल्डिंग में शिफ्ट करते समय उनका केस पेपर गायब हो गया था। उस दिन उनका बेटा संजय भी साथ में था। इसके बाद 12 तारीख को उनकी मौत हो गई लेकिन महारानी दिन का केस पेपर गायब हो जाने से उनके बारे में जानकारी नहीं पता चल सकी थी। जिससे कि सिविल अस्पताल वालों ने उन्हें अजनबी के तौर पर पोस्टमार्टम रूम में लाश रखवा दी और पुलिस को भी इसकी जानकारी दे दी। हालांकि पुलिस ने अंतिम विधि नहीं करने दिया था। जिसके चलते उनका बेटा संजय जब उनकी खोज कर रहा था तब उनके नहीं रहने की जानकारी मिल सकी।

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