मात्र एक घंटे में पास हो कोरोना मरीजों का बिल - हाईकोर्ट ने दिया आदेश

बीमा-कंपनियों द्वारा लिए जाने वाले अधिक समय के कारण मरीजों के डिस्चार्ज में हो रही थी देरी, जरूरतमंद मरीजों को देखनी पड़ती है राह

देश भर में कोरोना के बढ़ते संक्रमण के कारण अस्पतालों में बेड की कमी होने की बात सामने आई है। अस्पतालों में बढ़ रहे वेटिंग लिस्ट के कारण मरीजों को भी काफी तकलीगोन का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में हाईकोर्ट द्वारा एक महत्वपूर्ण फैसला लिया गया है। बीमा कंपनियों द्वारा कोरोना संक्रमित मरीजों का बिल पास करने के लिए 6 से त घंटे का समय लेने वाले बीमा कंपनियों को निर्देश देते हुये कोर्ट ने कहा की सभी मरीजों का बिल के बिल को मात्र 1 घंटे में ही मंजूरी मिल जानी चाहिए। 
जज प्रतिमा एम सिंह ने चेतावनी देते हुये कहा की यदि कोई बीमा कंपनी या थर्ड पारी एडमिनिस्ट्रेटर प्रोसेसिंग इन्स्योरंस क्लेम के बिल को क्लियर करने के लिए 6 से 7 घंटे लेगा तो उसे कोर्ट की अवमानना मानी जाएगी और उन पर कार्यवाही होगी। अपने आदेश में बीमा कंपनियों और टीपीए की अस्पतालों को आवेदन मिलने के बाद बिल को मंजूरी मिलने के बाद 30 मिनट से लेकर 60 मिनट से अधिक समय नहीं लगना चाहिए।
इसके अलावा कोर्ट ने अस्पताल मेनेजमेंट को निर्देश दिये है की वह मरीज के ठीक होने के बाद ही डिस्चार्ज प्रोसेस पूर्ण होने की राह देखने की राह देख बिना नए मरीज को भर्ती करता रहे, जिससे की जरूरतमंद मरीजों को समय अपर बेड मिल सके। कोर्ट ने अपना तर्क देते हुये कहा की बीमा कंपनी और टीपीए बिलों पर काफी देरी से मंजूरी प्रदान करती है। जिसके कारण अस्पताल तंत्र मजबूरी में मरीज को 8 से 10 घंटे तक बेड पर रखती है और यही कारण है की जरूरत मंद मरीजों को अस्पताल में बेड के लिए भटकना पड़ता है। 

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