सूरत : रेमडेसिविर की कालाबाजारी करने वाले लोगों को सूरत क्राइम ब्रांच ने पकड़ा,सारे इंजेक्शन सिविल को सौपें

प्रतिकात्मक तस्वीर (Photo : IANS)

आपदा को अवसर में बदलते हुए रेमडेसिविर इंजेक्शन की कर रहे थे कालाबाजारी, नकली ग्राहक बन क्राइम ब्रांच ने किया फंडाफोड़

देश में कोरोना की स्थिति बहुत गंभीर बनती जा रही है। कोरोना संक्रमित मामलों की संख्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही हैं। हाल ही के दिनों में हर दिन 3 लाख से अधिक नए संक्रमित मामले सामने आ रहे हैं। साथ ही हर दिन 2 हजार से अधिक लोग मर रहे हैं। ऐसे में संक्रमित मरीजों को अस्पतालों में बेड नहीं मिल रहे हैं वहीं दूसरी ओर अधिकांश राज्यों में ऑक्सीजन की भारी कमी देखी जा रही हैं। कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ने के साथ ही दवाओं की कालाबाजारी भी हो रही है। इस बीमारी से बचाव में सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा रेमडेसिविर इंजेक्शन 20 हजार से लेकर 60 हजार तक में बेचा जा रहा है। रेमडेसिवीर इंजेक्शन की कालाबाजारी का एक ऐसा ही मामला सूरत में सामने आया है जहाँ गुप्त सूचना के आधार पर नकली ग्राहक बन सूरत क्राइम ब्रांच ने कालाबाजारी कर रहे 6 लोगों को गिरफ्तार किया है।
आपको बता दें कि एक तरफ जहां कोविड मरीजों के लिए जरूरी रेमडेसिविर इंजेक्शन पाने के लिए कोरोना संक्रमित मरीजों के परिजन दिन-रात सड़कों पर लाइन में खड़े रहने को मजबूर हैं तो वही दूसरी ओर रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी की जा रही हैं। सूरत क्राइम ब्रांच ने कालाबाजारियों के कब्जे से एक दर्जन रेमडेसिवीर इंजेक्शन, मोबाइल फ़ोन और 2.46 लाख नकदी सहित लगभग 3 लाख जब्त किए हैं। इस बारे में जानकारी देते हुए शहर पुलिस आयुक्त अजय तोमर ने बताया कि पुणागाम सीताराम सोसायटी निवासी कल्पेश मकवाणा, मुक्तिधाम सोसायटी निवासी प्रदीप कातरिया, गोडादरा लक्ष्मीपार्क सोसायटी निवासी शैलेष हडिया, नितीन हडिय़ा, पुणागाम संतोषीनगर सोसायटी निवासी योगेश कवाड़ व मोटा वराछा उतराण सौराष्ट्र पैलेस निवासी विवेक धामेलिया मिलकर इंजेक्शन की कालाबाजारी का नेटवर्क चला रहे थे।
प्रतिकात्मक तस्वीर (Photo : IANS)
जानकारी के लिए बता दें कि पुलिस का कहना है कि सूरत में बढ़ते कोरोना के बीच गंभीर मरीजों के लिए सबसे ज्यादा जरूरी रेमडेसिविर इंजेक्शन की भारी कमी देखी जा रही है। ऐसे में इंजेक्शन की कमी के चलते इंजेक्शन की कला बाजारी होने अंदेशा पहले से ही था। इसी बीच पुलिस ने मिली गुप्त सूचना के आधार पर नकली ग्राहक बनकर जाँच शुरू की और कालाबाजारी करने वाले लोगों को धरदबोचा। आरोपियों से प्राथमिक पूछताछ में लगभग बीस इंजेक्शनों की कालाबाजारी सामने आई है, लेकिन पुलिस का कहना है कि आरोपियों ने प्रति इंजेक्शन 20-25 हजार रुपए तक लिए हैं। 
शहर में बढ़ते कोरोना संक्रमण और मरीजों की बढ़ती संख्या के बीच रेमडेसिविर इंजेक्शन  की किल्लत को देखते हुए इस मामले में क्राइम ब्रांच में आरोपियों के पास से बरामद किए हुए रेमडेसिविर इंजेक्शन अपने पास सबूत की तरह रखने के बदले इसको सूरत सिविल अस्पताल को दे दिया। पुलिस ने आरोपियों पर अलग अलग धारों के तहत मामला दर्ज करते हुए कार्यवाही शुरू कर दी है। साथ ही इसके जैसे और भी रैकेट शहर में सक्रिय होने की आशंका जताई जा रही है। पुलिस का कहना हैं कि इस संबंध में जरुरी कार्यवाही की जा रही है।

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