सूरत : जल्द ही बदलेगा सुवन आवास का नाम, गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों को घर देने के लिए एसएमसी कर रही है ये काम

सुमन आवास नाम थोड़ी अजीब है इसलिए अब उस स्थल को सूरत आवास की जगह 'सुमन होम्स' का नाम दिया जाएगा

गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों के लिए अपने घर के सपने को साकार करने के लिए सूरत मनपा (एसएमसी) की आवास योजना बहुत लोकप्रिय हो गई है। मुख्यमंत्री और पीएम आवास योजना आवास योजना के तहत जहां हजारों परिवारों को फ्लैट मिले हैं, वहीं चालू वित्त वर्ष के लिए सूरत मनपा के बजट में भी 10 हजार और मकान बनाने का प्रावधान किया गया है। आवास स्थान के मुद्दे की जांच कर रही स्लम सुधार समिति के सामने एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया।
नगर निगम द्वारा विभिन्न अंचलों में आवास योजना के प्रयोजनार्थ आरक्षित 28 स्थानों में 2.56 लाख वर्ग मीटर स्थान हैं, जिन पर आवास निर्माण किया जाना है, लेकिन अनिश्चित कारणों से उस क्षेत्र द्वारा स्पष्ट सहमती नहीं मिल पा रही है और इसी कारण आवास योजना शुरू नहीं हो सकी। ऐसे में स्लम सुधार समिति के अध्यक्ष दिनेश राजपुरोहित ने अध्यक्ष परेश पटेल के साथ मिलकर एक समय में एक स्थान पर कब्जा करने और उस क्षेत्र के माध्यम से बाधाओं को हटाकर आवास योजना के लिए स्पष्ट राय प्राप्त करने का अभियान शुरू किया है।
समिति के अध्यक्ष दिनेश राजपुरोहित ने कहा कि शहर को स्लम मुक्त शहर बनाने के लिए, भारतीय नगर निगम (एमसीसीआई) ने अब तक टेनमेंट, वाम्बे आवास, एलआईजे, ईडब्ल्यूएस जेएनयूआरएम और मुख्यमंत्री और प्रधान मंत्री आवास योजना के तहत 94888 घरों का निर्माण किया है। एक समय में शहर की 11.27 फीसदी आबादी झुग्गियों में रहती थी, जो अब घटकर 4.5 फीसदी हो गई है। मनपा के भाजपा शासक उन सभी को हटाने और उन्हें सुरक्षित पनाह देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। नगर पालिका ने आवास के लिए 2.54 लाख वर्ग फुट जगह जो 17547 घरों को समायोजित कर सकती है, ऐसे कई भूखंड आरक्षित किए हैं,  पर अभी तक उन जगहों पर कब्जा नहीं किया गया है जिसका प्रचार समिति द्वारा किया जा रहा है। 
बता दें कि दिनेश राजपुरोहित ने कहा कि भारतीय नगर निगम (एमसीसीआई) द्वारा बन रहे फ्लैटों का निजी बिल्डरों से मुकाबला है। लेकिन सुमन आवास नाम थोड़ी अजीब है इसलिए अब उस स्थल को सूरत आवास की जगह 'सुमन होम्स' का नाम दिया जाएगा। इसके लिए नगर आयुक्त की सहमती एक लिए कार्यवाही शुरू कर दी गयी हैं।

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