सूरत : संबित पात्रा ने भारत जोड़ो यात्रा पर टिप्पणी करते कहां कांग्रेस कितनी बार राहुल गांधी को लोन्च करेगी

बीजेपी प्रवक्ता ने कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा

सूरत भाजपा कार्यालय में मीडिया सेंटर का राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने उद्घाटन किया, आदिवासियों को लेकर कांग्रेस पर हमला किया

गुजरात विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी के दिग्गज मैदान में उतर गए हैं। इस बीच बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा आज सूरत के दौरे पर हैं। वे सूरत में भाजपा के मीडिया सेंटर का उद्घाटन करने के बाद संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया। जिसमें उन्होंने कुछ मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की, मोदी सरकार की उपलब्धियां गिनाते रहे लेकिन कुछ मुद्दों पर गोल-गोल जवाब देते रहे। जिसमें मंहगाई के मुद्दे पर सन्नाटा पसरा रहा।

महंगाई पर राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा की चुप्पी


देश में महंगाई बढ़ती जा रही है। इससे मध्यम व गरीब वर्ग पर आर्थिक बोझ आ रहा है। खाने-पीने की चीजों से लेकर जीवन की जरूरत की सभी चीजों के दाम आसमान छू चुके हैं। जब संबित पात्रा से पत्रकारों ने महंगाई के बारे में पूछा तो उन्होंने इस जवाब को टालने की कोशिश की। और कहा कि देश लगातार तरक्की कर रहा है, आर्थिक मोर्चे पर आगे बढ़ रहे हैं। वे विश्व आर्थिक स्थिति में भारत के बहुत आगे बढऩे की बात करते रहे। लेकिन क्या महंगाई का असर अब आम लोगों पर पड़ रहा है, इस संबंध में उन्होंने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया।

कांग्रेस कितनी बार राहुल गांधी को लॉन्च करेगी


उन्होंने राहुल गांधी पर टिप्पणी करते हुए कहा कि वह भारत को जोड नहीं रहे हैं बल्कि भारत को तोड़ रहे हैं। उन्होंने इतने वर्षों तक देश पर शासन किया। अब भी उन्हें भारत जोडने के लिए मजबूर किया जा रहा है। हालांकि यह यात्रा राहुल गांधी को एक बार फिर राजनीति में लॉन्च करने के लिए है। लेकिन अब राहुल गांधी का पेट्रोल खत्म हो गया है। राहुल गांधी के नेता ही उन पर विश्वास नहीं करते। कल महुवा में हुई सभा में भरतसिंह सोलंकी ने हिंदी से गुजराती में अनुवाद करते हुए उन्हे अनुवाद करते रोक दिया।

आदिवासियों के लिए बीजेपी में अहम जगह


भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने आदिवासी महिलाओं को राष्ट्रपति जैसे उच्च पदों पर बिठाया है। राहुल गांधी हमेशा एक के बाद एक टेप बजाते रहते हैं। आदिवासियों की जमीन छीन ली जाती है। आदिवासियों के साथ गलत व्यवहार किया जाता है। लेकिन गुजरात में जो विकास हो रहा है। आदिवासियों का योगदान बहुत अधिक है। आदिवासियों का कोई ठिकाना सरकार ने जबरन नहीं लिया है। आदिवासियों ने बीजेपी से हाथ मिला लिया है और नतीजे दिखने लगे हैं।

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