सूरत : फोस्टा ने केंद्रीय बजट के संदर्भ में वित्तमंत्री से लगाई गुहार

सूरत के रींगरोड स्थित कपडा मार्केट का नजारा

जीएसटी 12 प्रतिशत की अधिसूचना को पुर्णतः निरस्त करने मांग रखी , टेक्स देनेवाले व्यापारियों के रिटायरमेंट पर पेंशन और दुघर्टना बीमा देने की मांग की

बजट से पूर्व फोस्टा ने कपड़ा व्यापारियों की ओर से वित्त मंत्री को पत्र लिखकर अहम मांगे पेश की 
फेडरेशन ऑफ सूरत टेक्सटाइल ट्रेडर्स एसोसिएशन फोस्टा ने केंद्रीय बजट में वित्तमंत्री को व्यापारियों की ओर से कुछ सुझाव देकर उन्हें बजट में प्राथमिकता देने की मांग की है।जिसमें  टैक्सपेयर्स के लिए इन्कम टैक्स स्लैब को तर्क संगत बनाया जाये तथा 5 लाख से कम आय वालों को पूर्ण आयकर मुक्त रखा जाए ।  टैक्स सरलीकरण की दिशा में नई सोच की पहल कराए। इन्कमटैक्स में 80 सी  के निवेश की छूट बढ़ाकर आम आदमी के बचत की आदत को बढ़ावा दिलाए। कपड़ा उद्योग में कोविड की मार से उद्योग में नये रोजगारी सर्जन और उत्पादन बढ़ाने का लक्ष्य रखकर नई योजनाओं को प्राथमिकता दी जाए।
रिसर्च और डेवलपमेंट का बजट बढ़ाकर टेक्सटाइल उद्योग को एक्सपोर्ट करने के मापदंडों पर देशों के सामने प्रतिस्पर्धा में कार्य कर सकें ऐसी पहल की जाए। टेक्सटाइल उद्योग पर जीएसटी 12 प्रतिशत की अधिसूचना 14/2021 को जीएसटी काउंसिलिंग में निरस्त किया जाए और उद्योग को रोजगार व उत्पादन युक्त बनाने के लिए जीएसटी में रिफोर्म करने की पहल की जाए। कपड़ा उद्योग को बढ़ावा देने के लिए मेघा टेक्सटाइल पार्क, गारमेंट हब व एक्सपोर्ट को बढ़ाने आदि में केंद्र सरकार व राज्य सरकार प्रोत्साहन के लिए कम ब्याज का लोन, इंसेन्टिव योजना आदि का पैकेज देने की पहल की जाएं। लगातार तीन सालों से कोविड में छोटे छोट व्यापारी जिसकी लागत व्यापार में कम है वह अधिक प्रभावित हुआ है। एमएसएमई योजना में ट्रेडर्स जिनकी सालाना टर्न ओवर 5 से 10 करोड़ है। उनके लिए विशेष पैकेज देकर आर्थिक व्यापार में सहयोग करें। सूरत कपड़ा उद्योग को बढ़ावा देने के लिए जीएसपी और एफटीए से अनुबंध अधिक देशों के साथ करें ताकि हमारा कपड़ा निर्यात बढ़ सकें। आयकर पोर्टल की खामियां दूर की जाए और रिटर्न फाइल करने में होने वाली देरी को ब्याज, पेनल्टी से मुक्त किया जाए और पोर्टल को सरल बनाया जाए। व्यापारी वर्ग जो इन्कम टैक्स, जीएसटी और अन्य टैक्स देता है उसे अपने रिटायरमेंट के दिनों में सम्मान के साथ पेशन और दुघर्टना बीमा की व्यवस्था की जाए।

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