राजकोट : गाने गा-गा कर बच्चों को गणित पढ़ाने वाली शिक्षिका को राज्य स्तर पर मिला श्रेष्ठ शिक्षक का पुरस्कार

(Photo Credit :gujaratsamachar.com)

गुजरात राज्य शिक्षा विभाग द्वारा सर्वश्रेष्ठ शिक्षक की घोषणा, राजकोट की दो महिला शिक्षक शामिल

हाल ही में गुजरात राज्य शिक्षा विभाग द्वारा सर्वश्रेष्ठ शिक्षक की घोषणा की गई है। इसमें राजकोट की दो महिला शिक्षकों को शामिल करने के बाद दिल्ली से घोषित राष्ट्रीय स्तर पर 44 सर्वश्रेष्ठ शिक्षकों की सूची में गुजरात के दो शिक्षकों को शामिल किया गया है। राजकोट नगर निगम द्वारा संचालित सरोजिनी नायडू गर्ल्स स्कूल की प्रिंसिपल सोनलबेन फल्दू, उपलेटा प्राइमरी स्कूल की शिक्षिका रंजनाबेन निमावत, जबकि राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार के लिए राजकोट नगर निगम द्वारा संचालित प्राइमरी स्कूल की 93 वर्षीय वनीताबेन राठौर को चुना गया है। राजकोट की एक शिक्षिका रंजनाबेन निमावत का सर्वश्रेष्ठ शिक्षक के रूप में चुने जाने के पीछे अपने बच्चों को पढ़ाने की एक अद्भुत शैली है।
राजकोट मु। राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार के लिए नायडू गर्ल्स स्कूल सरोजिनी की प्रिंसिपल सोनलबेन फल्दू, उपलेटा प्राइमरी स्कूल की शिक्षिका रंजनाबेन निमावत और राजकोट म्यू कॉर्पो संचालित प्राइमरी स्कूल की प्रिंसिपल 93 वर्षीय वनीताबेन राठौर को चुना गया है। राजकोट की एक शिक्षिका रंजनाबेन निमावत का अपने बच्चों को सर्वश्रेष्ठ शिक्षक के रूप में चुने जाने के पीछे पढ़ाने की एक अद्भुत शैली है।
आपको बता दें कि कुछ शिक्षक गानों के जरिए बच्चों को हंसाते हैं, उनका मनोरंजना करते हैं। लेकिन रंजनाबेन निमावत गणित जैसे जटिल विषय को गानों के जरिए पढ़ाती हैं। इसी उपलब्धि के कारण उन्हें राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2021 के सर्वश्रेष्ठ शिक्षक के पुरस्कार के लिए चुना गया है। रंजनाबेन निमावत राजकोट के उपलेटा के वडाली प्राइमरी स्कूल में शिक्षिका हैं। उन्होंने गुजराती विषय के अक्षरों की पहचान के लिए खिलौनों के साथ-साथ खेल और गीतों का भी सहारा लिया है। इस नवाचार के कारण, रंजनाबेन पूरे गुजरात में लोकप्रिय हैं। उन्हें वर्ष 2018 में तालुका स्तर पर और वर्ष 2019 में जिला स्तर पर सर्वश्रेष्ठ शिक्षक का पुरस्कार मिला।
आपको बता दें कि रंजनाबेन ने बच्चों को पढ़ाने के लिए तरह-तरह के इनोवेशन किए हैं। जिसके अच्छे परिणाम सामने आए हैं। वे गणित पढ़ाने के लिए गाती हैं। गाने के सहारे वो बच्चों को 1 से 100 तक गिनना सिखाती है। इसी तरह उन्होंने गुजराती वर्णमाला और व्यंजन सिखाने के लिए नवाचार किया है। वो गीत, खेल, खिलौने की मदद से बच्चे को सिखाती हैं।

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