राजकोट : लाईन में शुरू हुआ दिन लाईन में ही हो जाता है खत्म, कोरोना के कारण अब थक चुके है शहरवासी

(Photo Credit : divyabhaskar.co.in)

5 किलोमीटर लंबी लाइनों में 12 घंटे खड़े रह रहे है लोग, ऑक्सीज़न और रेमड़ेसिविर इंजेक्शन के चलते परेशान हुये लोग

राज्य भर में कोरोनावायरस की स्थिति के कारण स्थिति काफी खराब है। बढ़ते संक्रमण के कारण ऑक्सीज़न की भी काफी आवश्यकता पड़ने लगी है। जिसके चलते लोग को लंबी-लंबी लाइन में लग कर ऑक्सीज़न सिलिंडर मिलने की उम्मीद लगा रहे है। राज्य के महानगर राजकोट में तो लोग सुबह से लेकर शाम तक रेमडेसीविर और ऑक्सीजन के लिए लाइन में खड़े रहते देखने मिल रहे हैं। हर सुबह की शुरुआत मात्र इसी का सवाल से होती है कि ऑक्सीजन कहां रिफिल हो सकता है और वहां कितनी वेटिंग है?
हॉस्पिटल का कैंपस हो या चाय की लारी हर जगह फोन पर यही इस बात सुनाई देती है कि क्या आपके यहां इंजेक्शन है? क्या आपके यहां ऑक्सीजन है? क्या अस्पताल में बेड मिल सकेगा? लगातार तीन दिन से लोग इस तरह से भटक रहे हैं, कोई ऑक्सीजन की गैस सिलेंडर तो कोई ऑक्सीजन किट ढूंढ रहा है। इन सभी के बीच कोई भी अपने परिजनों के स्वास्थ्य के लिए पैसों की भी चिंता नहीं कर रहा। लोग पानी की तरह पैसा बहाने को भी तैयार हो रहे है। 
(Photo : IANS)
बढ़ रहे कोरोना के कारण हालत ऐसी है कि मानो खुद मेडिकल सर्विस वेंटिलेटर पर आ चुकी हो। शहर की कॉविड अस्पताल में बेड कम पड़ गए हैं और बढ़ते हुए केसों को देखते हुए तंत्र द्वारा चौधरी हाई स्कूल के मैदान में भी मरीजों के लिए बेड डालने का निर्णय लिया गया है। शुक्रवार को ऑक्सीजन की कमी से 4 मरीजों की मौत होने की खबर सामने आई है। ऐसी स्थिति है कि मरीज अब एंबुलेंस की राह भी नहीं देखते, जो भी वाहन मिलता है उसमें ऑक्सीजन सिलिंडर के साथ सिविल में पहुंच जा रहे हैं। कोई रिक्शा में आ रहा है तो कोई टेंपो में इलाज करवा रहा है। अस्पताल के बाहर 12 घंटे लाइन में खड़े होने के बावजूद उनकी बारी नहीं आती है। कई लोग तो 24 घंटे चले उतना ऑक्सीजन लेने के लिए 12-12 घंटे तक 5 किलोमीटर लंबी लाइन में खड़े हो रहे है। 
इस बारे में बात करते हुये कुछ परिजनों का कहना है कि जब उनके स्वजन की स्थिति अचानक से बिगड़ जाती है या ऑक्सीज़न अचानक से खाली हो जाता है तो यहाँ-वहाँ दौड़ना पड़ता है। वही एक मरीज के स्वजन ने कहा की कोरोना ने पूरी सिस्टम को हिलाकर रख दिया है, अब मानसिक रूप से उन्हें थकावट होती है। अब यह सब नहीं सहा जाता। 

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