राजकोट: खेतों में ये लगाकर इस किसान ने सुरक्षित किया अपना भविष्य

(Photo : zeenews.com)

खेतों में लगाया चंदन का पौधा, 120 रूपये के लागत से कमाने वाले हैं लाखों

गुजरात के किसान दिन-ब-दिन प्रगतिशील होते जा रहे हैं और कृषि में कुछ नया करके अधिक आय अर्जित करने का प्रयास कर रहे हैं। धोराजी के ऐसे ही एक किसान ने गुजरात में असंभव चंदन की खेती करके अपनी भविष्य की आय दर्ज की है और कुछ ही निवेश से लाखों का लाभ कमा लिया। राजकोट जिले के धोराजी के 55 वर्षीय किसान भगवानजीभाई चावड़िया अपनी खेती में कुछ अलग करने की कोशिश कर रहे हैं। कुछ समय पहले भगवानजीभाई को YouTube पर चंदन की खेती के बारे में पता चला और उन्हें अपने खेत में चंदन लगाने का विचार आया और इसके लिए उन्होंने शुरुआत की। उन्होंने अपने एक एकड़ खेत में चंदन के पेड़ लगाए।
आज से चार साल पहले उन्होंने मात्र 120 रुपये में एक चंदन का पौधा खरीदा और अपने खेत में लगभग 600 पौधे लगाए और आज 4 साल बाद यह बहुत अच्छा और विकसित हो गया है। चंदन के पेड़ लगाने के फायदे बताते हुए भगवानजीभाई ने कहा कि एक बार चंदन के पेड़ लगाने के बाद उन्हें केवल 2 साल तक थोड़ी सी देखभाल की जरूरत होती है और उसके बाद उन्हें किसी जरूरी देखभाल की जरूरत नहीं होती है। एक बार जब यह एक पेड़ बन जाता है तो इसे तब तक देखभाल की आवश्यकता नहीं होती जब तक इसे काटा नहीं जाता है।
इधर-उधर निराई-गुड़ाई के अलावा कोई काम नहीं है। जब आय की बात आती है, भगवानजीभाई ने अपना भविष्य बहुत सुरक्षित कर लिया है, क्योंकि चंदन के पौधे की कीमत केवल 120 रुपये है और इसे लगाने के बाद 15 साल तक कोई रखरखाव नहीं होता है और 15 साल बाद एक पेड़ कम से कम 2 लाख रुपये का हो जाता है। अगर देखा जाए तो भगवानजीभाई बहुत कम प्रयास और निवेश से भविष्य में लाखों रुपये कमाएंगे। इसके साथ ही भगवानजीभाई अन्य किसानों को भी चंदन की खेती करने के लिए कहते हैं। सरकार भी किसानों को चंदन की खेती के लिए प्रोत्साहित करते हुए प्रति पेड़ 30 रुपये की सब्सिडी देती है।
कई किसान भवनजीभाई द्वारा की गई चंदन की खेती को देखने और इसके बारे में जानने के लिए आते हैं और भगवानजीभाई उन्हें इस मामले की सारी जानकारी देते हैं। सरकार की चंदन की खेती नीति से किसान प्रभावित हो रहे हैं और ऐसे में निकट भविष्य में सब्सिडी और चंदन की खेती बढ़ने की संभावना है। सोशल मीडिया पर तकनीक और सूचनाओं के प्रवाह से किसान भी नई जानकारी प्राप्त कर रहे हैं और अपनी पारंपरिक खेती को छोड़कर दूसरी खेती पर जा रहे हैं। किसानों को अब उन्हें विकसित करने के लिए केवल समर्पण और कड़ी मेहनत की जरूरत है जबकि अन्य किसानों को भी भगवानजीभाई जैसे किसान से प्रेरणा लेने की जरूरत है।

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