राजकोट : अंधविश्वास का चौंकाने वाला मामला आया सामने, दो महीने की बेटी के बीमार होने पर मजदूर परिवार डॉक्टर के बदले तांत्रिक के पास पहुंचा

प्रतिकात्मक तस्वीर (File Photo: IANS)

हालत बिगड़ने पर बच्ची को राजकोट के सिविल अस्पताल के केटी चिल्ड्रेन हॉस्पिटल में भर्ती कराया

गुजरात भले ही लगातार विकास कर रहा हो, लेकिन यहां अभी भी ऐसे लोग है जो अंधविश्वास में विश्वास करते है। राजकोट से अंधविश्वास का एक और मामला सामने आया है जहां मूल मध्यप्रदेश में रहने वाले और गोंडल में काम करने वाले एक परिवार ने अपनी बीमार 2 महीने की बेटी को दवा की जगह बाधा दिलाने की कोशिश की। 
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गुरुवार को गोंडल से राजकोट के सिविल अस्पताल के केटी चिल्ड्रेन हॉस्पिटल में दो माह की बच्ची को भर्ती कराया गया। गोंडल शहर के एक निजी अस्पताल और फिर एक सरकारी अस्पताल में इलाज के बाद लड़की को आगे के इलाज के लिए राजकोट के केटी अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया। बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराने के बाद पूरा मामला सामने आया।
मूल रूप से मध्य प्रदेश का और गोंडल में गुंडाला चौकड़ी के पास रहने वाला यह परिवार पिछले कई सालों से गुजरात में रह रहा है। तनाव, आक्षेप और बुखार से पीड़ित होने के कारण मजदूर परिवार अपनी बेटी को दाहोद के कटवाड़ा गांव के तांत्रिक के पास ले गए। तांत्रिक ने बच्ची को बेहतर महसूस कराने के लिए पेट पर तीन बांध दिए हैं। इस बात को खुद बेटी के पिता ने कबूल की है। फिर आने वाले दिनों में विज्ञान जत्थे की टीम दाहोद के कटवारा गांव पहुंचकर भुवा के खिलाफ कार्रवाई करेगी।
गौरतलब है कि आज भी अंधविश्वास में डूबे लोग अपने बच्चों को बीमार होने पर डॉक्टर के पास ले जाने की बजाय तांत्रिकों या झोलाछाप के पास ले जाते हैं। इसके बाद भी वो आशा करते है कि उनके बच्चे ठीक हो जायेंगे पर जब बच्चे की हालत ज्यादा ख़राब हो जाती है तो बच्चे को अस्पताल ले जाते हैं। इस मामले में अधिक सामाजिक और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता की आवश्यक है।

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