भगवान करे गुजरात के इस आयुर्वेदिक रिसर्चर की दवा कोरोना को मात दे दे, परिणाम तो अच्छे बता रहे!

(Photo : ANI)

अगर सफल रही दवा तो बड़े तेजी से ठीक हो सकेंगे कोरोना मरीज, आयुर्वेदिक होने से इस दवा से कोई नुकसान भी सामने नहीं आया

बीते साल से दुनिया कोविड के आतंक से जूझ रहा है। हर देश अपने अपने स्तर पर कोरोना महामारी से निपने के लिए तरह तरह के दवाइयों पर काम कर रहे हैं। साथ ही कोई देशों की वैक्सीन्स को उपयोग में भी ले लिया गया है। भारत में भी कोविशिल्ड और कोवैक्सिन नामक वैक्सीन को मान्यता देकर देशभर में बड़े पैमाने पर टीकाकरण शुरू किया है। ऐसे में देश के लिए एक अच्छी खबर सामने आई है।
अहमदाबाद के दो सरकारी अस्पतालों में एक नए दवा पर ट्रायल किया गया और परिणाम में इस दवा को कोरोना के खिलाफ कारगर पाया गया है।इस दवा का नाम 'आयुध एडवांस’ है और इसे इक्कीस प्रकार की आयुर्वेदिक औषधियों से निर्मित किया गया है। दवा के ट्रायल के दौरान पाया गया कि इसकी असरकार क्षमता मात्र चार दिन है और इतने ही समय में इस दवा ने वायरस के संक्रमण को काफी हद तक कम कर दिया।
आपको बता दें कि इस दवा के परिक्षण में अहमदाबाद के एसवीपी अस्पताल के 60 जबकि सोला सिविल के 120 मरीजों को ये दवा दी गई और ये दवा उन पर काफी कारगर सिद्ध हुई। साथ ही इस दवा का कोई साइड इफेक्ट भी सामने नहीं आया है। परिक्षण के दौरान जिन मरीजों को ये दवा दी गई वे सभी नेगेटिव आए और बुखार, खांसी और सांस की तकलीफ जैसे लक्षणों में बेहद सुधार देखा गया।
आपको बता दें कि कंटेम्परेरी क्लिनिकल ट्रायल कम्युनिकेशन' मैग्जीन में छपी एक रिसर्च के मुताबिक आयुध कोरोना के इलाज में एडवांस स्टैंडर्ड ऑफ केयर पर खरी उतरी है। भारत के ट्रांसलेशन हेल्थ साइंस एंड टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट (टीएचएसटीआई) और भारत सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी द्वारा रेमडेसिविर की तुलना में 'एएयूडीएच एडवांस' को 3 गुना अधिक प्रभावी पाया गया। साथ ही इस दवा पर अधिक रिसर्च के लिए इसके पेपर्स होवार्ड भेजे गये है। यह रिसर्च नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इन्फॉर्मेशन, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ, अमेरिका की वेबसाइट पर भी प्रकाशित हुई है।
गुजरात में निर्मित यह आयुर्वेदिक दवा एक लिक्विड है जिसमें 21 तरह के पौधों के अर्क शामिल हैं। आयुर्वेदिक सामग्रियों इस दवा को अधिक प्रभावी और सुरक्षित बताते हैं। इसका उपयोग 50,000 से अधिक लोगों द्वारा किया जा रहा है। वही ट्रायल की बात करें तो इस दवा को पहले रिसर्च के दौरान माइल्ड रोगियों पर इसको परखा गया। पहले क्लिनिकल रिसर्च के सफल परिणामों के बाद इसके बड़े परिक्षण किए गए। इसके बाद इसे गंभीर बीमारी वाले मरीजों पर जांचा गया। इन रोगियों को दिन में चार बार इसकी डोज दी गई और वे केवल चार दिनों के भीतर ही ठीक हो गए।

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