दक्षिण गुजरात में तूफान से आम के भाव 200-300 रुपये तक गिरे

(Photo Credit : dainikbhaskar.com)

तूफान के कारण 17 हजार टन से भी अधिक आम गिरे, एपीएमसी के बाहर लगी आम बेचने के लिए लंबी लाइन

तूफान ताऊ'ते से हुई भारी बारिश ने राज्य के किसानों को मुश्किल में डाल दिया है। क्योंकि बेमौसम बारिश के कारण किसानों को उनकी फसल बर्बाद होने का डर सता रहा है। वहीं तेज हवाओं और बारिश के कारण आम के पेड़ों पर लगे आम भी गिर गए है, जिससे की आम के बागों वाले किसान इस समय मुश्किल में हैं। दक्षिण गुजरात की बात करें तो तूफान के दूसरे दिन किसान जमीन पर पड़े आम बेचने के लिए एपीएमसी बाजार के बाहर और विभिन्न मंडलियों के बाहर लाइन में लगे रहे। दक्षिण गुजरात में आए तूफान से करीब 17,130 टन आम गिरे। आम की कीमत जो पहले 1,100 रुपये से 1,400 रुपये प्रति मन थी, लेकिन तूफान के बाद अब 200 रुपये से 400 रुपये मन हो गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक इस साल नवसारी में 34 हजार हेक्टेयर में आम की फसल तैयार हुई थी। अभी तक 40 फीसदी आम उतारे जा चुके हैं और 60 फीसदी आम पेड़ों पर थे। लेकिन पेड़ों पर मौजूद 40 से 60 फीसदी आम आंधी के चलते जमीन पर गिर गए। नतीजतन केसर और हाफस की कीमत 1,500 रुपये मन से घटकर 200 रुपये से 800 रुपये मन पर आ गई है। इसी तरह सूरत में 3063 हेक्टेयर में आम की फसल तैयार हुई थी, लेकिन तूफान के दूसरे दिन एपीएमसी बाजार में करीब 8000 टन आम बेचने के लिए किसानों की लंबी कतारें देखी गईं। एपीएमसी बाजार में बुधवार को 1,100 रुपये से 1,400 रुपये मन में बिक रहे आम बमुश्किल 200 से 300 रुपये मन में बिके।

गौरतलब है कि वलसाड के पारडी, उदवाडा, धरमपुर, भिलाड और नानापोधा समेत एपीएमसी में आए तूफान के बाद पिछले दो दिनों में 7130 टन आम गिरे है। कुछ दिन पहले हाफुस और केसर आम 1,200 रुपये प्रति मन के हिसाब से बिक रहे थे, लेकिन तूफान के बाद आम 300 रुपये प्रति मन के हिसाब से बिक रहे हैं। ऐसे में तूफान से किसानों को काफी नुकसान सहन करने की बारी आई है। सूरत जिला पंचायत के डीडीओ डी.एस गढ़वी ने कहा कि तूफान ने सूरत जिले में फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है और नुकसान का पता लगाने के लिए गुरुवार से एक सर्वेक्षण किया जाएगा। सूरत जिले के ओलपाड, मंगरोल, पलसाना, उमरपाड़ा, चोर्यासी, बारडोली, कामरेज और महुवा तालुकाओं में धान और बागवानी फसलों को मिलाकर 200 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। सरकार के निर्देश के मुताबिक नुकसान का आकलन करने के लिए सर्वे शुरू किया जाएगा।
वहीं एपीएमसी के एक प्रमुख व्यापारी अरुण त्रिपाठी ने कहा कि मौसम के दौरान लोगों द्वारा खाने के लिए आम खरीदने से पहले ही तूफान ने आम की फसल को नुकसान पहुंचाया है। अब आम के पेड़ों पर जो आम बचे है उसके किसानों को बचे हुए आमों के अच्छे दाम मिलेंगे। वर्तमान में गिरे हुए आम की डिब्बाबंदी में देने के लिए खरीदा गया।

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