गुजरात : सात माह की गर्भवती किशोरी को देना होगा बच्चे को जन्म, कोर्ट ने खारिज की गर्भपात की मांग

प्रतिकात्मक तस्वीर

अदालत ने नई सिविल अस्पताल में डॉक्टरों के एक पैनल से गर्भपात पर अभिप्राय मांगी थी

अदालत ने नई सिविल अस्पताल में डॉक्टरों के एक पैनल से गर्भपात पर अभिप्राय मांगी थी। पैनल ने अपनी राय में कहा कि बच्चा 30 से 32 सप्ताह या आठ महीने का गर्भ है।
भरूच जिले की रहने वाली महिला ने मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट, 1971 की धाराओं के तहत अपनी 17 वर्षीय एवं सात महीने की गर्भवती बेटी को गर्भपात की अनुमति देने के लिए भरुच कोर्ट में याचिका दायर किया था। याचिका में महिला ने कहा कि बीमार पडऩे पर जब वह अपनी बेटी को अस्पताल ले गई तो जांच में पता चला कि वह सात माह की गर्भवती है।
पूछताछ करने पर उसने बताया कि अक्षय नाम के युवक ने उसके साथ जबरन सेक्स किया और वह गर्भवती हो गई। महिला ने आरोपी के खिलाफ कोसम्बा थाने में रेप एंड पॉक्सो एक्ट की धाराओं के तहत शिकायत भी दर्ज कराई है। आरोपी द्वारा किए गए रेप से बेटी प्रेग्नेंट हो गई है और वह यह प्रेग्नेंसी नहीं चाहती है। बच्चा पैदा भी हो जाए तो उसका कोई भविष्य नहीं होता। अदालत ने नई सिविल अस्पताल में डॉक्टरों के एक पैनल से गर्भपात पर राय मांगी थी। पैनल ने अपनी राय में कहा कि बच्चा 30 से 32 सप्ताह या आठ महीने की गर्भवती है। अगर गर्भपात की अनुमति दी जाती है तो किशोरी की जान को खतरा हो सकता है। आवेदन पर अंतिम सुनवाई के बाद कोर्ट ने डॉक्टरों की राय पर विचार करते हुए आवेदन को खारिज कर दिया। 

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