सूरत : एक ही परिवार से माता-पुत्र का नेत्रदान, मानवता के लिए बना प्रेरणादायी उदाहरण
स्व. अंबाबेन और स्व. उमेशभाई लाढिया के नेत्रदान से दो दृष्टिबाधित लोगों के जीवन में आएगा उजाला
मानव सेवा और परोपकार की मिसाल पेश करते हुए एक ही परिवार से माता एवं पुत्र का नेत्रदान किया गया। स्वर्गीय अंबाबेन पुंजाभाई लाढिया और उनके पुत्र स्वर्गीय उमेशभाई पुंजाभाई लाढिया के नेत्र लोक दृष्टि चक्षु बैंक एवं रेड क्रॉस चोर्यासी शाखा को समर्पित किए गए। स्व. अंबाबेन पुंजाभाई लाढिया एवं स्व. उमेशभाई लाढिया मूल रूप से ग्राम समढियाला पट्टी, तहसील महुवा, जिला भावनगर के निवासी थे और वर्तमान में सूरत के मोटा वराछा स्थित 7, श्रेयस रो-हाउस, रिवर केंट के पीछे, यमुना चौक क्षेत्र में निवास कर रहे थे।
उनके निधन के पश्चात परिवार के सदस्य घनश्यामभाई लाढिया द्वारा लोक दृष्टि चक्षु बैंक एवं रेड क्रॉस के अध्यक्ष डॉ. प्रफुलभाई शिरोया को सूचना दी गई। इसके बाद संस्था के उपाध्यक्ष दिनेशभाई जोगाणी एवं डॉ. राजकिशोर बेहेरा ने नेत्रदान की प्रक्रिया पूरी कर दोनों के नेत्र स्वीकार किए।
परिवार के सुपुत्र मुकेशभाई, मनोजभाई एवं गीताबेन की सहमति से तथा पौत्र जेमीशभाई, हर्षितभाई, प्रांशुभाई, कृपालीबेन, क्रिशाबेन सहित परिवारजनों, मित्रों, पड़ोसियों और स्नेहीजनों की उपस्थिति में यह पुण्य कार्य संपन्न हुआ। इस अवसर पर नेत्रदाता परिवार के प्रति आभार व्यक्त किया गया। माता और पुत्र दोनों के नेत्र अब किसी जरूरतमंद के जीवन में रोशनी बनेंगे। उनके दान किए गए नेत्रों से दो दृष्टिबाधित व्यक्तियों को नेत्र प्रत्यारोपण के माध्यम से नई दृष्टि प्राप्त होने की संभावना है। यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
लोक दृष्टि चक्षु बैंक के ट्रस्टियों, रोटरी क्लब ऑफ सूरत ईस्ट के अध्यक्ष किशोरभाई मांगरोलिया, जोन चेयरमैन जगदीशभाई बोडरा, पूर्व अध्यक्ष किशोर बलर एवं क्लब के सभी सदस्यों ने लाढिया परिवार को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए इस महान कार्य के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि जीते जी रक्तदान और मृत्यु के पश्चात नेत्रदान, देहदान एवं अंगदान मानवता की सबसे श्रेष्ठ सेवा और सर्वोत्तम दान है।
