सूरत : पुलिस बनी ममता की मिसाल, लावारिस नवजात बच्ची की ‘छठी’ मनाकर किया नामकरण
पांडेसरा पुलिस स्टेशन में भावुक आयोजन, मासूम बच्ची का नाम रखा गया ‘कशिश’
सूरत। कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी निभाने वाली पुलिस का एक संवेदनशील और मानवीय चेहरा सूरत के पांडेसरा पुलिस स्टेशन में देखने को मिला।
लावारिस हालत में मिली एक नवजात बच्ची की देखभाल करने के बाद पुलिसकर्मियों ने उसकी ‘छठी’ मनाई, नामकरण संस्कार किया और उसे एक परिवार जैसा स्नेह दिया। गुजरात पुलिस के इतिहास में यह घटना मानवता और संवेदनशीलता की अनूठी मिसाल बन गई है।
जानकारी के अनुसार, 21 मई 2026 को बमरोली रोड स्थित औद्योगिक क्षेत्र में एक नवजात बच्ची चार पहिया वाहन के नीचे लावारिस अवस्था में मिली थी। भीषण गर्मी के बीच वहां से गुजर रहे एक रिक्शा चालक ने बच्ची को देखा और तुरंत पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दी।
सूचना मिलते ही पांडेसरा पुलिस की पीसीआर वैन मौके पर पहुंची और 108 एम्बुलेंस की सहायता से बच्ची को तत्काल उपचार के लिए न्यू सिविल अस्पताल पहुंचाया गया।
अस्पताल में भर्ती बच्ची की हालत गंभीर थी। इस दौरान पांडेसरा पुलिस स्टेशन की महिला पुलिसकर्मियों ने मातृत्व भाव के साथ उसकी देखभाल की। लगातार 13 दिनों तक उन्होंने दिन-रात उसकी सेवा की। चिकित्सकों के उपचार और पुलिसकर्मियों की देखभाल से बच्ची पूरी तरह स्वस्थ हो गई।
बच्ची के स्वस्थ होने पर एच डिवीजन के एसीपी जेड.आर. देसाई तथा पांडेसरा पुलिस स्टेशन के पीआई के.डी. जडेजा के मार्गदर्शन में पुलिस स्टाफ ने उसकी ‘छठी’ मनाने का निर्णय लिया।
छठी समारोह के अवसर पर पुलिस स्टेशन को फूलों और सजावट से सजाया गया। वैदिक परंपराओं के अनुसार पूजा-अर्चना कर नवजात का नामकरण संस्कार संपन्न कराया गया। इस अवसर पर बच्ची को कपड़े, कंबल, खिलौने, बेबी केयर किट, स्वास्थ्य एवं स्वच्छता सामग्री सहित अनेक उपयोगी उपहार भेंट किए गए।
समारोह के दौरान नवजात बच्ची का नाम ‘कशिश’ रखा गया। ‘कशिश’ का अर्थ आकर्षण और ऐसा अपनापन है जो किसी भी व्यक्ति के हृदय को स्पर्श कर ले। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि यह नाम बच्ची के जीवन में प्रेम, सुरक्षा और नए अवसरों का प्रतीक बनेगा।
इस आयोजन में महिला हेड कांस्टेबल भाग्यश्री वाघेला, तेजलबा परमार, केशवीबेन चावड़ा सहित ‘शी टीम’ के सदस्यों और अन्य पुलिसकर्मियों ने सक्रिय भूमिका निभाई। अधिक मास के पवित्र दिनों में आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक रस्म नहीं, बल्कि मानवता, करुणा और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश बन गया।
पांडेसरा पुलिस की इस पहल ने यह साबित कर दिया कि खाकी वर्दी केवल कानून की रक्षा ही नहीं करती, बल्कि जरूरत पड़ने पर ममता और संरक्षण का भी सबसे बड़ा सहारा बन सकती है। अब ‘कशिश’ को ऐसा परिवार मिल गया है, जो उसकी सुरक्षा और भविष्य के लिए हर समय उसके साथ खड़ा है।
