सूरत : नगर निगम में जनगणना ड्यूटी को लेकर विवाद, जूनियर बने सुपरवाइजर तो सीनियर कर्मचारियों में नाराज़गी
कर्मचारियों ने प्रशासनिक असंतुलन का लगाया आरोप, आदेश में तत्काल बदलाव की मांग
सूरत। सूरत म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन में शुरू होने जा रही जनगणना प्रक्रिया को लेकर कर्मचारियों के बीच असंतोष बढ़ता जा रहा है। जनगणना विभाग द्वारा जारी ड्यूटी आदेशों पर सवाल उठाते हुए कर्मचारियों ने प्रशासनिक समझ और पदानुक्रम के संतुलन की कमी का आरोप लगाया है।
विवाद इस बात को लेकर है कि वरिष्ठ कर्मचारियों को एन्यूमरेटर की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि जूनियर कर्मचारियों को सुपरवाइजर नियुक्त किया गया है।
कर्मचारियों का कहना है कि इससे न केवल प्रशासनिक ढांचे की पारंपरिक व्यवस्था प्रभावित हुई है, बल्कि वरिष्ठ कर्मचारियों के आत्मसम्मान और पद की गरिमा को भी ठेस पहुंची है। मामले को लेकर नगर निगम के विभिन्न विभागों में नाराज़गी का माहौल है और जनगणना विभाग को लिखित रूप से आदेशों में बदलाव की मांग भेजी गई है।
करीब 15 वर्षों बाद शुरू हो रही जनगणना प्रक्रिया पहले से ही कई विवादों में घिरती दिखाई दे रही है। इससे पहले दिव्यांग कर्मचारियों को ड्यूटी देने और कर्मचारियों को उनके निवास स्थान से काफी दूर क्षेत्रों में नियुक्त करने जैसी शिकायतें सामने आई थीं। अब वरिष्ठ और कनिष्ठ कर्मचारियों के बीच जिम्मेदारियों के बंटवारे को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है।
नगर निगम के बिजली विभाग समेत कई विभागों के कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि लंबे समय से प्रशासनिक कार्यों का अनुभव रखने वाले वरिष्ठ कर्मचारियों को घर-घर जाकर जनगणना का कार्य सौंपा गया है, जबकि उनके ही जूनियर कर्मचारियों को सुपरवाइजर बना दिया गया है।
कर्मचारियों का कहना है कि यदि आदेश में बदलाव नहीं किया गया, तो वर्षों का अनुभव रखने वाले वरिष्ठ कर्मचारियों को फील्ड में काम करने के बाद अपने जूनियर अधिकारियों को रिपोर्ट करनी पड़ेगी। इतना ही नहीं, वही जूनियर कर्मचारी उनके कार्य की निगरानी भी करेंगे, जिसे कर्मचारी पद की गरिमा के खिलाफ मान रहे हैं।
नगर निगम कर्मचारियों के बीच यह चर्चा भी तेज है कि जनगणना विभाग ने बिना किसी प्रशासनिक अध्ययन और कर्मचारियों के पद व अनुभव का मूल्यांकन किए आदेश जारी कर दिए हैं। कर्मचारियों का कहना है कि एक ही पद पर कार्यरत कर्मचारियों को अलग-अलग जोन में अलग-अलग जिम्मेदारियां देना प्रशासनिक असमानता को दर्शाता है।
फिलहाल, बिजली विभाग सहित कई विभागों के कर्मचारियों ने जनगणना विभाग को पत्र लिखकर आदेशों में तत्काल संशोधन की मांग की है। अब सभी की निगाहें नगर निगम प्रशासन पर टिकी हैं कि वह कर्मचारियों की आपत्तियों को स्वीकार कर आदेशों में बदलाव करता है या नहीं।
