सूरत : अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस पर श्रमिक सम्मेलन, नई श्रम संहिताओं के खिलाफ उठी आवाज
मजदूर नेताओं ने श्रमिकों के शोषण, लंबी कार्य अवधि और श्रम कानूनों में बदलाव को लेकर जताया आक्रोश
सूरत। अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस के उपलक्ष्य में सूरत जिला टेक्सटाइल मार्केटिंग ट्रांसपोर्ट लेबर यूनियन द्वारा गुरुवार रात सहारा दरवाजा स्थित राजीव नगर में एक विशाल श्रमिक सम्मेलन का आयोजन किया गया।
सम्मेलन में बड़ी संख्या में श्रमिकों और मजदूर नेताओं ने भाग लिया तथा केंद्र सरकार द्वारा लागू की जा रही नई श्रम संहिताओं के खिलाफ तीखा विरोध दर्ज कराया।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए गुजरात इंटक के अध्यक्ष नैषध देसाई ने कहा कि सूरत में श्रमिकों की स्थिति चिंताजनक होती जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि औद्योगिक इकाइयों में मजदूरों से 14 से 15 घंटे तक काम कराया जा रहा है, जिससे उनके स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि अधिकांश इकाइयों में श्रमिकों को पर्याप्त सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए जाते, जिसके चलते दुर्घटनाओं में कई मजदूरों की जान चली जाती है या वे गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं।
उन्होंने कहा कि शहर के अधिकांश श्रमिक आज भी न्यूनतम वेतन, पीएफ और ईएसआईसी जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। ऐसे हालात में श्रमिकों को संगठित होकर अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने की आवश्यकता है।
मजदूर यूनियन के प्रवक्ता शान खान ने अपने संबोधन में कहा कि सरकार सुधार के नाम पर पुराने श्रम कानूनों को समाप्त कर नई श्रम संहिताएं लागू कर रही है, जो मजदूर विरोधी और पूंजीपतियों के हित में हैं।
उन्होंने दावा किया कि नई श्रम संहिताओं के लागू होने के बाद यूनियन संचालन और हड़ताल जैसे श्रमिकों के बुनियादी अधिकार कमजोर हो जाएंगे।
उन्होंने श्रमिकों से एकजुट होकर अपने अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के दौरान कपड़ा बाजार के पार्सल ढुलाई ठेकेदारों के सहयोग से 101 श्रमिक महिलाओं को साड़ियां वितरित की गईं।
सम्मेलन में उमाशंकर मिश्रा, सरोज तिवारी, आरती पटेल, दिनेश पांडे, आसिफ खलीफा, कैलाशपति शुक्ला समेत बड़ी संख्या में श्रमिक उपस्थित रहे।
