सूरत : डिप्टी सीएम हर्ष संघवी ने नए पार्षदों को दी नसीहत: “पद का अहंकार नहीं, जनता की सेवा याद रखें”
मजूरा क्षेत्र के जनसेवा कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री ने कार्यकर्ताओं और जनता को लौटाए सम्मान-उपहार, कहा— “पांच साल बाद जनता और संगठन हिसाब लेंगे”
सूरत। उप मुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने सूरत के मजूरा विधानसभा क्षेत्र में आयोजित जनसेवा एवं सम्मान कार्यक्रम में नए चुने गए पार्षदों और पार्टी पदाधिकारियों को सेवा, विनम्रता और जवाबदेही का संदेश दिया।
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने स्पष्ट कहा कि चुने हुए प्रतिनिधियों को सत्ता के अहंकार से दूर रहकर जनता की सेवा करनी चाहिए, क्योंकि “पांच साल बाद जनता और संगठन दोनों हिसाब लेंगे।”
कार्यक्रम में भारतीय जनता पार्टी के कई पदाधिकारी, पार्षद और बड़ी संख्या में जमीनी कार्यकर्ता मौजूद रहे। इस दौरान उपमुख्यमंत्री को मिले सम्मान और उपहारों को उन्होंने स्वयं अपने पास रखने के बजाय पारदर्शी तरीके से कार्यकर्ताओं और नागरिकों के बीच वितरित कर दिया।
बुजुर्गों ने निकाला ड्रॉ, संघवी ने खुद दिए उपहार
कार्यक्रम की शुरुआत भावनात्मक माहौल के बीच हुई। हर्ष संघवी ने प्रोटोकॉल से हटकर समाज के बुजुर्गों को विशेष सम्मान देते हुए उपहार वितरण की जिम्मेदारी उन्हें सौंपी। कैलाशजी सहित पांच बुजुर्गों ने ड्रॉ सिस्टम के जरिए विजेताओं का चयन किया। इसके बाद संघवी ने स्वयं मंच से विजेताओं को उपहार और मोमेंटो प्रदान किए।
उन्होंने कहा कि यह वितरण पूरी तरह निष्पक्ष और समान अवसर के सिद्धांत पर आधारित था, ताकि किसी के साथ भेदभाव न हो।
“अपने मन से पार्षद होने का बोझ निकाल दें”अपने संबोधन में हर्ष संघवी ने नए पार्षदों को संबोधित करते हुए कहा, “अपने मन में यह बोझ मत रखिए कि आप पार्षद बन गए हैं। यह पद केवल जनता की सेवा का अवसर है।”
उन्होंने कहा कि राजनीति में कई लोग आते-जाते रहते हैं, लेकिन जनता के साथ व्यवहार ही किसी जनप्रतिनिधि की असली पहचान बनाता है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि किसी आम नागरिक के साथ गलत व्यवहार किया गया, तो वह सबसे बड़ी गलती मानी जाएगी।
संघवी ने कहा कि कार्यकर्ता दिन-रात मेहनत करके नेताओं को जिताते हैं, लेकिन यदि जनप्रतिनिधि जनता से दुर्व्यवहार करे तो कार्यकर्ताओं की मेहनत बेकार हो जाती है।
“जनता और संगठन दोनों जवाब मांगेंगे” उन्होंने कार्यकर्ताओं की भूमिका को राजनीति की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए कहा कि किसी भी जीत के पीछे जमीनी कार्यकर्ताओं का समर्पण और पसीना होता है। उन्होंने नए प्रतिनिधियों को याद दिलाया कि पांच वर्षों का कार्यकाल बहुत जल्दी समाप्त हो जाता है और उसके बाद जनता एवं संगठन दोनों जवाब मांगते हैं।
युवाओं को संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि वरिष्ठों के मार्गदर्शन के बिना राजनीति में भटकने की संभावना बढ़ जाती है, इसलिए अनुभव और अनुशासन दोनों जरूरी हैं।
सार्वजनिक रूप से मांगी माफी
कार्यक्रम के दौरान हर्ष संघवी ने अपने व्यस्त कार्यक्रमों के कारण कई बार कार्यकर्ताओं से व्यक्तिगत रूप से नहीं मिल पाने पर सार्वजनिक रूप से माफी भी मांगी। उन्होंने कहा, “मुझे मिले उपहारों की कीमत नहीं, बल्कि उससे जुड़ा आपका स्नेह महत्वपूर्ण है। यह सब आपका ही है और मैंने केवल उसे वापस आप तक पहुंचाने का प्रयास किया है।”
सूरत में यह कार्यक्रम जनसेवा, सादगी और विनम्र नेतृत्व की मिसाल के रूप में चर्चा का विषय बना रहा।
