सूरत : पांडेसरा में टेक्सटाइल उद्योग और DGTS की अहम बैठक, स्टीम पर GST दरें बढ़ाने और इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर सुधारने की मांग
DGTS के वरिष्ठ अधिकारी बोले—“आप सुझाव दें, बदलाव के लिए हम तैयार”; GST और ETS से जुड़े मुद्दे रहे केंद्र में
सूरत । पांडेसरा स्थित SGTPA (साउथ गुजरात टेक्सटाइल प्रोसेसर्स एसोसिएशन) में आयोजित कर्टसी मीटिंग में इंडस्ट्री से जुड़े अहम मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में टैक्सेशन से लेकर पॉलिसी सुधार तक कई महत्वपूर्ण विषयों को उठाया गया, जिससे इंडस्ट्री और विभाग के बीच बेहतर संवाद की दिशा में कदम बढ़ाया गया।
कार्यक्रम के दौरान DGTS (AZU) के प्रिंसिपल एडिशनल डायरेक्टर जनरल श्री सुमित कुमार का स्वागत SGTPA के प्रतिनिधि श्री कमलविजय तुलसियान द्वारा गुलदस्ता भेंट कर किया गया।
अपने संबोधन में श्री सुमित कुमार ने इंडस्ट्री प्रतिनिधियों को आश्वस्त करते हुए कहा कि विभाग सुझावों के लिए खुला है और आवश्यक बदलावों के लिए तैयार है।
मीटिंग में SGTPA के पदाधिकारी और मैनेजिंग कमेटी के सदस्य भी मौजूद रहे, जिनमें श्री जितेंद्र वखारिया, श्री विशाल बुधिया समेत अन्य सदस्य शामिल थे।
चर्चा के दौरान CETP के ऑपरेशन और मेंटेनेंस चार्ज पर GST तथा एमिशन ट्रेडिंग स्कीम (ETS) पर GST जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। विशेष रूप से, स्टीमहाउस इंडस्ट्री से जुड़े विषय पर ध्यान केंद्रित किया गया, जहां बताया गया कि हालिया GST बदलावों के कारण इनपुट और आउटपुट टैक्स में असंतुलन (इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर) की स्थिति पैदा हो गई है।
श्री विशाल बुधिया (स्टीमहाउस इंडिया लिमिटेड) ने प्रस्तुति में यह बताया गया कि कोयले पर GST दर 5% से बढ़ाकर 18% कर दी गई है, जबकि स्टीम पर GST 12% से घटाकर 5% कर दिया गया है।
इस बदलाव के चलते इंडस्ट्री को इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) रिफंड, वर्किंग कैपिटल ब्लॉकेज और कैश फ्लो से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इंडस्ट्री प्रतिनिधियों ने स्टीम पर GST दर को फिर से 18% करने की मांग रखी।
इसके अलावा, ETS पर GST के प्रभाव को लेकर भी इंडस्ट्री की चिंताओं को सामने रखा गया और इसमें राहत देने की अपील की गई।
मीटिंग के अंत में यह उम्मीद जताई गई कि इस तरह के संवाद से इंडस्ट्री और सरकारी विभाग के बीच सहयोग बढ़ेगा और भविष्य में इंडस्ट्री के हित में सकारात्मक नीतिगत फैसले लिए जा सकेंगे।
