सूरत : नगर निगम में प्रशासनिक सख्ती, अनुशासन के लिए पहली बार विस्तृत एसओपी लागू
कमिश्नर एम. नागराजन का बड़ा फैसला, लापरवाही और भ्रष्टाचार पर तय समयसीमा में होगी कड़ी कार्रवाई
सूरत। सूरत म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन में प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और प्रभावी बनाने के लिए नगर आयुक्त एम. नागराजन ने सख्त कदम उठाया है। निगम के इतिहास में पहली बार कर्मचारियों और अधिकारियों के अनुशासन को सुनिश्चित करने के लिए विस्तृत ‘स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर’ (एसओपी) लागू किया गया है।
नई गाइडलाइन के तहत ड्यूटी में लापरवाही, बिना अनुमति अनुपस्थित रहने या भ्रष्टाचार में लिप्त पाए जाने वाले कर्मचारियों के खिलाफ तय समयसीमा में चरणबद्ध और कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
दरअसल, पिछले कुछ समय से निगम के विभिन्न जोनों और मुख्य कार्यालय में अनुशासनहीनता, फाइलों के निपटारे में देरी और वित्तीय अनियमितताओं की शिकायतें सामने आ रही थीं। इन समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए आयुक्त ने स्पष्ट किया है कि नगर निगम का हर कर्मचारी जनता के प्रति जवाबदेह है और उसे सक्रिय रहना अनिवार्य होगा।
एसओपी के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई को चार चरणों में विभाजित किया गया है। पहले चरण में संबंधित कर्मचारी से 1 से 3 दिन के भीतर लिखित स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर दूसरे चरण में 7 दिन की समयसीमा के साथ मेमो जारी किया जाएगा। इसके बाद भी सुधार नहीं होने पर तीसरे चरण में 15 दिन की अवधि के साथ शो-कॉज नोटिस जारी होगा, जिसमें आर्थिक दंड सहित अन्य दंडात्मक प्रावधान शामिल हैं।
गंभीर मामलों, जैसे भ्रष्टाचार या नैतिक आचरण से जुड़े मामलों में सीधे चौथे चरण के तहत चार्जशीट जारी की जाएगी, जिसका जवाब 21 दिनों के भीतर देना अनिवार्य होगा।
महत्वपूर्ण बात यह है कि अब विभागीय जांच को अधिकतम 180 दिनों (6 महीने) के भीतर पूरा करना अनिवार्य किया गया है। यदि जांच अधिकारी निर्धारित समय में जांच पूरी नहीं करता, तो उसके खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
एसओपी में यह भी प्रावधान किया गया है कि किसी कर्मचारी की लापरवाही से निगम को वित्तीय नुकसान होने पर उसकी भरपाई संबंधित कर्मचारी के वेतन से की जाएगी। वहीं, भ्रष्टाचार के मामलों में दोषी पाए जाने पर सेवा समाप्ति या अनिवार्य सेवानिवृत्ति जैसे कड़े कदम उठाए जाएंगे।
नए नियमों के तहत स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) लेकर जांच से बचने की प्रवृत्ति पर भी रोक लगाई गई है। अब सेवानिवृत्ति के चार वर्षों के भीतर भी संबंधित कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई शुरू की जा सकेगी।
हालांकि, कर्मचारियों को न्याय का अवसर देने के लिए अपील की व्यवस्था भी रखी गई है। किसी कार्रवाई से असंतुष्ट कर्मचारी 45 दिनों के भीतर स्टैंडिंग कमेटी के समक्ष अपील कर सकेगा।
नगर निगम का यह कदम न केवल प्रशासनिक अनुशासन को मजबूत करेगा, बल्कि नागरिकों को बेहतर और समयबद्ध सेवाएं उपलब्ध कराने में भी सहायक साबित होगा।
